‘जज साहब, यह देखिए हेरोइन की पुड़िया। इसे मैंने जेल से ही 1500 रुपये में खरीदा है। वहां नशे का कारोबार चल रहा है। जेल अधिकारी कैदियों को नशा बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
ऐसा न करने पर बुरी तरह पीटते हैं। मैं हाथ जोड़ता हूं, आप मेरी जेल बदल दीजिए।’ न्यू नाभा जेल से पेशी से लाए गए एक कैदी ने जैसे ही कोर्ट में यह बात कही, तो जज सहित वहां मौजूद हर शख्स हैरान रह गया।
कोर्ट में पेशी को आया था कैदी
सोमवार को न्यू नाभा जेल के कैदी धीरज बत्ता को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट आशीष सालदी की अदालत में पेश किया गया। धीरज पर मारपीट समेत कई अन्य मामले चल रहे हैं।
इस दौरान उसने जज के सामने पुड़िया पेश की जिसमें सफेद रंग का पदार्थ था। उसने कहा कि यह हेरोइन है। जिसे उसने 1500 रुपये में जेल में ही खरीदा था।
उसने जज के सामने कहा कि न्यू नाभा जेल का डिप्टी सुरिंटेंडेंट देवपाल सिंह कैदियों को नशे की तस्करी के लिए कहता है। दूसरी ओर देवपाल सिंह सभी आरोपों का खंडन किया।
साथ ही उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से उनका कोई लेना देना नहीं है। अदालत ने पूरे मामले में मटौर थाने के एसएचओ अतुल सोनी को जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही आरोपी को रोपड़ जेल में शिफ्ट कर दिया है।
इस खुलासे से गहरा धक्का लगा है। इससे बादल सरकार के दावों की पोल खुल गई है।
बलबीर सिंह सिद्धू, नेता, कांग्रेस
नशा बेचने पर मिलती हैं सुविधाएं
बत्ता ने बताया कि यदि कोई कै दी नशा बचने से मना करता है तो पुलिसकर्मी उसके साथ मारपीट करते हैं। नशे के कारोबार में शामिल होने पर कैदियों को जेल के अंदर मोबाइल फोन एवं अन्य कई तरह की वस्तुएं रखने की इजाजत दे दी जाती है। रोजाना जेल में 30 से 40 के करीब लोग आकर पुलिस को नशा सप्लाई करते हैं। इसके बाद पुलिस वाले आगे बेचने का कारोबार करते हैं।
हर कैदी के लिए फिक्स टारगेट
अदालत के बाहर धीरज के साथी हेरी ने कहा कि जेल में उनको जबरदस्ती नशा बेचने के लिए मजबूर किया जाता है। एक कैदी से महीने में कुल 20 हजार रुपये से ज्यादा नशा सप्लाई कराया जाता है।
बत्ता अक्सर जेल स्टाफ एवं अन्य कैदियों से लड़ता रहता है। वह ऐसे आरोप लगाकर हमारी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।
देवपाल सिंह, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, न्यू नाभा जेल