किताब घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ विनोद कुमार की संदिग्ध हालत में मौत के बाद उनका शव सुखना लेक चौकी पुलिस ने वीरवार को उनके परिजनों के हवाले कर दिया। शव को लेने उनके परिजन सेक्टर 16 जनरल अस्पताल में पहुंचे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि मौत 12 घंटे पहले हुई है।
पुलिस को विनोद कुमार की जेब से 1100 रुपये और जरूरी कागजात भी मिले थे, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर रखा है। पुलिस ने विसरा के सैंपल सीएफएसएल को भेज दिए हैं। पुलिस डॉ. विनोद के फोन की कॉल डिटेल भी निकाल रही है।
सुखना लेक में मंगलवार दोपहर सीढ़ी नंबर चार के शव मिला था। पुलिस ने शव को निकालकर सेक्टर-16 जनरल अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया था। बुधवार को शव की पहचान खरड़ निवासी मोहाली के पूर्व जिला शिक्षा अफसर विनोद कुमार के रुप में हुई थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर शव को मोर्चरी में रखवा दिया था।
डीईओ विनोद कुमार की पत्नी विजय कुमारी ने पुलिस को बताया था कि मंगलवार सुबह सवा नौ बजे विनोद कुमार अपनी पत्नी के साथ मोहाली के फेज आठ स्थित एजुकेशन बोर्ड कार्यालय में पहुंचे। पति-पत्नी साथ ही काम करते थे, मगर दोनों के ऑफिस अलग-अलग फ्लोर पर थे।
शाम पांच बजे छुट्टी के बाद पत्नी विजय कुमारी ने पति को फोन किया तो रिंग जाती रही। पत्नी जब कार के पास आई तो मोबाइल और पर्स कार में ही मिला। कार की चाबी भी उसी में थी। परिजन मंगलवार रात विनोद कुमार की तलाश करते रहे थे।