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बुआ-बहन के 'हत्यारे' की सजा मात्र 3 साल की कैद

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दो-दो कत्ल और सजा केवल तीन साल। पांच साल पुराने मर्डर केस में ये फैसला आरोपी को दोषी करार देते हुए सुनाया गया। फैसला, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुनाया। आरोपी, अपराध के वक्त नाबालिग था, इसलिए इतनी कम सजा हुई।
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मामले की सुनवाई के दौरान वीरवार को बोर्ड के समक्ष पेश किए गए राहुल मल्हन ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद जज महेश कुमार की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने उसे सजा सुनाई। ईंट-भट्ठा व्यापारी राकेश मोहन पुरी के घर 21 सितंबर 2010 को राहुल ने पुरी की पत्नी और अपनी बुआ पूर्णिमा देवी और फुफेरी बहन डॉ. रोहिणी की तेजधार हथियारों से हत्या कर दी थी।

लुधियाना पुलिस ने राहुल मल्हन को 23 दिसंबर 2010 को उस समय गिरफ्तार किया था जब लूट की एक वारदात को अंजाम देते समय उसने एक महिला पर गोली चला दी थी। शोर सुनकर इकट्ठा हुई भीड़ ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
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लूट की नीयत से की थी हत्याएं

पुलिस जांच में उसने कबूल किया था कि उसने अपने दो साथियों दिल्ली के राहुल यादव और बिहार के राजेश सिंह सिंघा के साथ मिलकर अपनी बुआ पूर्णिमा पुरी और फुफेरी बहन डॉ. रोहिणी पुरी की लूट की नीयत से हत्या कर दी थी। राहुल ने बताया था कि वह अपने दोस्त राहुल यादव के साथ 21 सितंबर 2010 को सुबह साढ़े 10 बजे अपनी बुआ पूर्णिमा पुरी के घर पंहुचा।

उसकी बुआ कुर्सी पर बैठी थी। उसने अपने भतीजे से उसके साथ आए युवक के बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह उसका मित्र है। इस दौरान मौका पाते ही दोनों ने पूर्णिमा पुरी का गला रेत दिया। आवाज सुनकर डॉ. रोहिणी नीचे आई तो दोनों ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया। हत्या करने के बाद दोनों ने सबूत मिटाने के लिए घर को पानी से धो दिया और अलमारी तोड़ कर अंदर रखा कैश और गहने लूट लिए। इसके बाद दोनों घर की दीवार फांदकर फरार हो गए।

बाहर उनका साथी राजेश उनका इंतजार कर रहा था। वे तीनों बस से चंडीगढ़ चले गए और वहां एक होटल में लूट का पैसा बांट लिया। उसने लूट का 10 लाख रुपया अपने पास रखा और बाकी अपने साथियों को बांट दिया।

दोषियों को फांसी मिले : राकेश पुरी
मृतका पूर्णिमा पुरी के पति राकेश मोहन पुरी ने कहा कि वह न्याय से संतुष्ट नहीं है। राहुल मल्हण और उसके साथियों ने जिस तरह का जघन्य अपराध किया है। इस हिसाब से सजा नाकाफी है। वह सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार से निवेदन करते हैैं कि जुवेनाइल एक्ट में संशोधन कर इस तरह के मामलों की सजा फांसी की जाए।
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