नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) के नेशनल इनोवेशन ऑन क्लाइमेट रेजिलियेंट एग्रीकल्चर (निकरा) प्रोजेक्ट के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में आए पांच करोड़ के बजट में से एक करोड़ 23 लाख रुपये के गबन के मामले में सीआईए वन टीम ने आखिरकार एक माह बाद बुधवार को मुख्य आरोपी सुखविंद्र को गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 78 लाख रुपये की रिकवरी की है। इसमें 41 लाख रुपये नकद, सात लाख रुपये बैंक खाते से और 30 लाख रुपये के जेवरात शामिल हैं। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी और शेष राशि को बरामद करने के लिए पुलिस ने आरोपी को अदालत से तीन के रिमांड पर लिया है।
मंगलवार दोपहर करीब दो बजे गुप्त सूचना के आधार पर सीआईए वन टीम ने काछवा नहर पुल पर नाकाबंदी करके मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह, निवासी गली नंबर-2 गांधी नगर को धर दबोचा। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध कबूल करते हुए गांधी नगर में स्थित अपने मकान से 41 लाख रुपये नकद, 30 लाख रुपये के जेवरात बरामद कराए।
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सात लाख रुपये आरोपी के बैंक अकाउंट में मिले हैं। एसपी पंकज नैन ने बताया कि बकाया रकम की बरामदगी के लिए पुलिस पंजाब, कसोली हिमाचल प्रदेश और बनारस (यूपी) जाएगी और आरोपी की निशानदेही पर रकम बरामद करने की कोशिश करेगी।
पांच लोगों के खिलाफ दर्ज है मामला
करनाल एनडीआरआई गबन का आरोपी सुखविंद्र पुलिस हिरासत में
- फोटो : फाइल फोटो
मार्च में एनडीआरआई में ऑडिट हुआ। इस दौरान निकरा प्रोजेक्ट के तहत डाटा मिलान किया तो कर्मचारी कम और वेतन पर खर्च ज्यादा मिला। इस पर ऑडिट ने ऑब्जेक्शन लगा दिया। संस्थान की विजिलेंस अधिकारी डॉ. स्मिता सिरोही ने मामले पर संज्ञान लेते हुए आठ मार्च को पांच लोगों के खिलाफ शिकायत दी।
शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने रिसर्च एसोसिएट सुखविंद्र सिंह, मनप्रीत कौर (पीएचडी स्टूडेंट) निवासी नवांशहर पंजाब, अमरेंद्र कुमार श्रीवास्तव निवासी बनारस (यूपी), कर्मचारी दीपक कुमार निवासी करनाल और सुखविंद्र के भाई विक्रम के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 471 दर्ज किया था। तभी से पुलिस मामले की जांच कर रही थी। मामला बड़ा होने के कारण बाद में यह जांच सीआईए इंस्पेक्टर दीपक को सौंपी गई थी।
प्रोजेक्ट में कर्मचारी 12 और वेतन आता था 21 का
निकरा प्रोजेक्ट में 12 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन एक साल से सुखविंद्र सिंह 21 लोगों को कार्यरत दिखाकर उनका वेतन ले लेता था। नौकरी छोड़ चुके लोगों के नाम भी कर्मचारियों की लिस्ट में जोड़ देता था और उनके बिल बनाकर भेज देता था।
सुखविंद्र ने इसमें अपने भाई विक्रम और प्रेमिका (बाद में पत्नी बनी) मनप्रीत कौर के साथ ही संस्थान के कर्मचारी अमरेंद्र श्रीवास्तव और दीपक का भी सहयोग लिया। उसने विक्रम और मनप्रीत कौर के एकाउंट में भी रकम डलवाई थी। तीन साल पहले संस्थान में कांट्रेट पर नौकरी शुरू करने वाले सुखविंद्र ने धीरे-धीरे संस्थान में अपने पैर जमाए और अकाउंट का अच्छा ज्ञान होने के कारण वह अधिकारियों का चहेता बन गया था।
करनाल एनडीआरआई गबन का आरोपी सुखविंद्र पुलिस हिरासत में
- फोटो : फाइल फोटो
एनडीआरआई के निदेशक डा. एके श्रीवास्तव ने सुखविंद्र सिंह और अमरेंद्र सिंह को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था, साथ ही मनप्रीत कौर की पीएचडी की डिग्री रद्द कर दी थी। इसके साथ ही कर्मचारी दीपक को सस्पेंड कर दिया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गए थे, जिनमें से मास्टरमाइंड सुखविंद्र को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
प्रेमिका के लिए खरीद दिए डायमंड के नैकलेस
मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह ने प्रोजेक्ट के पैसे से अपनी प्रेमिका मनप्रीत कौर के लिए सोने के जेवर ही नहीं, बल्कि डायमंड तक के नेकलेस खरीद लिए थे। शादी वाले दिन ही उसने दुल्हन मनीप्रीत कौर को दस लाख रुपये का सोना गिफ्ट में दिया था। कुल मिलाकर उसने 30 लाख रुपये के गहने पत्नी के लिए खरीदे थे।
क्या है निकरा प्रोजेक्ट
निकरा प्रोजेक्ट वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य मौसम में बदलाव होने के कारण तापमान बढ़ने का पशुओं पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करना है।