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प्लॉट न देने पर सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर के एमडी को तीन वर्ष की कैद

Thu, 23 Jun 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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उपभोक्ता आयोग - फोटो : DEMO Pics
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बुकिंग अमाउंट लेने के बावजूद प्लॉट नहीं दिया, सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी को 3 वर्ष की कैद की सजा। प्लॉट न देने के दो अलग-अलग मामलों में राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग चंडीगढ़ ने सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तेजिंदर सिंह भाटिया को सजा सुनाई है। साथ ही उन पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पुलिस को उन्हें 25 जुलाई से पहले उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश करना होगा।
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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दोनों मामलों में पिछले वर्ष कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ बुकिंग अमाउंट लौटाने और 50 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। 10 दिसंबर 2015 को हुए फैसले को कंपनी ने नहीं माना था। उपभोक्ता आयोग के फैसले को लागू नहीं करने पर ही आयोग ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को  तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है।

यह था मामला : कालका निवासी अशोक कुमार जैन ने कंपनी की सेक्टर-66 (मोहाली) स्थित येलो स्टोन लैंडमार्क इंफोसिटी नाम की स्कीम में जनवरी, 2011 को एक 400 स्कवायर यार्ड्स का आईटी/रेजिडेंशियल प्लॉट बुक करवाया था। जैन ने इस प्लॉट के लिए कंपनी को 30 लाख 14 हजार रुपए जमा भी करवा दिए थे। कंपनी ने प्लॉट की बेसिक प्राइज पर जनवरी, 2011 में ही अलॉटमेंट लेटर भी इश्यू कर दिया था। कंपनी को 18 महीनों में पजेशन देना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
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उपभोक्ता आयोग ने दिसंबर, 2015 में कंपनी को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर के साथ 30 लाख 14 हजार रुपये लौटाने और 50 हजार रुपये मुआवजा देने को कहा। कंपनी को यह रकम चार किस्तों में लौटाने के निर्देश हुए। पहली किस्त 10 मार्च 2016 से पहले देनी थी, लेकिन कंपनी ने कोई पैसा नहीं लौटाया। इस पर जैन की ओर से कमीशन में एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन फाइल की गई। 

दूसरा केस सेक्टर-19 चंडीगढ़ के मनबीर सिंह का था। उसमें भी कंपनी ने ऐसा ही किया। जैन के वकील पंकज चांदगोठिया ने बताया कि कंपनी ने शुरुआत से ही अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस की। चांदगोठिया के मुताबिक असल में कंपनी के नाम कोई लाइसेंस नहीं था। यहां तक कि कंपनी के पास ऐसे प्रोजेक्ट के लिए जमीन भी नहीं थी। फिर भी उन्होंने प्री-लॉन्च ऑफर्स के साथ बुकिंग शुरू कर दी।

 चांदगोठिया के मुताबिक एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन पर कंपनी ने जवाब दिया कि आयकर विभाग ने कंपनी के अकाउंट सीज कर दिए थे, जिस कारण वे पैसा नहीं लौटा सके। हालांकि कोर्ट में अपने जवाब के मुताबिक कंपनी इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखा सकी।
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