रेव पार्टी के लिए कोबरा के जहर की तस्करी करने वालों को पुख्ता सूचना के बाद भी चंडीगढ़ पुलिस पकड़ने में नाकाम रही। वह तब जब इसकी सूचना केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की ओर से दी गई।
पुलिस के पास जांच के लिए कुछ धुंधले अंदाजे ही हैं। अब जिस ढंग से पूरे मामले में पुलिस लकीर पीट रही है, उससे नहीं लगता कि वह तस्करों के गिरेबां तक पहुंच पाएगी।
सुबह जिस वक्त पुलिस को एक खास बस में तस्करों के आने की सूचना मिली और उसने धरपकड़ के लिए प्लानिंग शुरू की, बस दिल्ली से निकल चुकी थी।
पुलिस जो बता रही है कि तस्कर करनाल में उतर गया, वह महज इत्तिफाक नहीं हो सकता। करोड़ों रुपये के इस नशे के कारोबार में किसी भेदिया के इशारे पर ही ऐसा हुआ होगा।
फुटेज भी धुंधली
पुलिस अधिकारियों के अनुसार दिल्ली बस स्टैंड से सीसीटीवी फुटेज मिली है मगर यह काफी घटिया क्वालिटी की और धुंधली है। इससे आरोपियों की पहचान कर पाना संभव नहीं है। तस्करी में किसी नाइजीरियन के शामिल होने का अनुमान है। अब दिल्ली पुलिस से भी मदद मांगी गई है।
यह था मामला
रेव पार्टी के लिए पंजाब रोडवेज की लग्जरी बस में दिल्ली से लाए जा रहे दो सांप और 600 एमएल कोबरा का जहर बुधवार को पुलिस और पीएफए की टीम ने बरामद किया था। जहर की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कोबरा के एक लीटर जहर की कीमत दो करोड़ रुपये है। नशे के धंधे में कोबरा का जहर के-72 और के-76 के नाम से जाना जाता है।
नशे के सौदागरों का बदलता ट्रेंड
पंजाब की पार्टियों में कोबरा के जहर का इस्तेमाल एक नया ट्रेंड है। हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ शिकंजा कसे जाने के बाद इसे विकल्प के तौर पर अपनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारी तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि जहर विदेश से आ रहा है।
दूसरी ओर चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की तुलना कोबरा के जहर से नहीं की जा सकती। इसकी हल्की सी मात्रा पेरालाइसिस और मौत दे सकती है।
ऐसा है असर
डायएसिटीलिनमोरफिन को बायर्स कपंनी के रिसर्च विभाग ने हेरोइन नाम दिया था। इसे मारफिन से भी दोगुना असरदार माना गया था। शरीर में जाते ही यह मोरफिन में बदल जाती है। इससे न्यूरोन स्तर प्रभावित होता है और व्यक्ति की अनुभूतियों में बदलाव होता है।
चिकित्सा जगत में इसका इस्तेमाल क्रानिक पेन, फिजिकल ट्रामा, केंसर की आखिरी स्टेज में रोगी को देने के लिए किया जाता है। शुद्ध हेरोइन का डिपेंडेंसी (लत लगना) और कांस्टीपेशन के अलावा और कोई दूरगामी साइड इफेक्ट नहीं माना जाता मगर तस्करों द्वारा सप्लाई की जाती हेरोइन में 70 से 40 फीसदी मिलावट होती है। यह मिलावट सस्ते रसायनों की होती है जो जहरीले होते हैं।
कोबरा के जहर में कई घातक एंजाइम्स होते हैं और यह अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। इनमें प्रोटीज ब्लड स्ट्रीम में जाते ही प्रोटीन चेन को तोड़कर एमिनो एसिड को अलग कर देते हैं। रेड सेल्स टूटने लगते हैं और ब्लड में क्लोटिंग शुरू हो जाती है।
इसके साथ ही हाइड्रोलाइसिस प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट्स फ्रकटोस अर ग्लूकोज में टूटते हैं और एक्वा आयन अलग होते हैं। ये आयन न्यूरोट्रांसमीटर का रास्ता रोकते हैं। इससे शरीर के महत्त्वपूर्ण अंदरूनी अंगों को काम करने का संदेश मिलने में बाधा आती है।