पंजाब के जिला होशियारपुर की दसूहा अदालत में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फर्जी आदेश पेश कर दो भाइयों ने प्लॉट का कब्जा रुकवा दिया। पीड़ित एग्जिक्यूशन पर रोक हटवाने हाईकोर्ट पहुंचा तो पता चला, कब्जे पर रोक का कोई आदेश हाईकोर्ट ने दिया ही नहीं है।
अब यह मामला अवमानना का बन गया है। जस्टिस हेमंत गुप्ता की डिवीजन बेंच ने दसूहा के दो भाइयों मुरारी लाल और विद्या सागर समेत होशियारपुर के वकील एके कालिया को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए? इस मामले की अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।
सतीश चंद्र के प्लॉट पर मुरारी लाल और विद्या सागर ने कब्जा कर रखा था। अदालत में दोनों भाई केस हार गए। प्लॉट का कब्जा देने के फैसले को लागू कराने के लिए सतीश चंद्र दसूहा की अदालत में एग्जिक्यूशन अर्जी दाखिल की थी। इसी बीच, दोनों भाइयों ने हाईकोर्ट के जस्टिस आरएन रैना की बेंच के नाम से जारी एक फैसले की प्रति दसूहा अदालत में पेश कर बताया कि कब्जे पर रोक लग गई है।
ऐसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
सतीश चंद्र ने इस रोक को हटवाने के लिए हाईकोर्ट के वकील सतबीर सिंह राठौर से संपर्क किया। कब्जे पर रोक के जिस फैसले का हवाला दसूहा अदालत में दिया गया था, उसमें हाईकोर्ट में अगली तारीख 18 सितंबर दर्शाई गई थी। एडवोकेट राठौर ने जब इस तारीख के केस देखे तो ऐसा कोई मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन नहीं था।
एडवोकेट राठौर को शक हुआ तो पता लगा कि जिस तारीख के जस्टिस रैना के फैसले का हवाला दसूहा अदालत में दिया गया, रोक का ऐसा निर्देश हुआ ही नहीं।
एडवोकेट राठौर ने जस्टिस रैना को पत्र भेजा कि इस मामले की जांच कराई जाए। उधर, मुरारी लाल और विद्या सागर की हरकत का पता दसूहा अदालत को भी लग गया था और संबंधित न्यायिक अधिकारी ने मामला होशियारपुर सेशन जज के पास उठाया। सेशन जज ने भी हाईकोर्ट को पत्र भेजकर मामले की जांच की सिफारिश की थी।
इस पर जस्टिस रैना ने मामले की जांच करने की नोटिंग हाईकोर्ट में रखी और यह मामला अवमानना का बन गया। मामला सुनवाई के लिए वीरवार को जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच के पास आया। हाईकोर्ट ने मुरारी लाल और विद्या के अलावा उनके वकील एके कालिया को अवमानना नोटिस जारी किया है।