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पंजाबी फिल्मों के लिए अलग से बनेगा सेंसर बोर्ड

Sun, 25 Jan 2015 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अपना अलग सेंसर बोर्ड स्थापित करेगी। यह बोर्ड सिख इतिहास पर आधारित फिल्मों और पुस्तकों आदि पर नजर रखेगा। एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा है कि जल्द गठित होने वाले इस बोर्ड में सिख इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि अगर किसी को सिख इतिहास पर आधारित फिल्म बनानी होगी या पुस्तक लिखनी होगी, तो उसे पहले बोर्ड को स्क्रिप्ट दिखानी पड़ेगी। बोर्ड द्वारा पास किए जाने पर ही फिल्म बन सकेगी। मक्कड़ ने उम्मीद जताई कि इससे विवादों पर लगाम लगेगी।

उन्होंने कहा कि बोर्ड का मकसद यह है कि आम लोगों के बीच सिख धर्म से संबंधित चीजें सिख मर्यादा के मुताबिक ही जाएं। हालांकि देश में फिल्मों पर नजर रखने के लिए केंद्रीय सेंसर बोर्ड है लेकिन मक्कड़ को उम्मीद है कि एसजीपीसी का अपना बोर्ड गठित होने से विवाद रोकने में मदद मिलेगी।
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मक्कड़ ने कहा कि प्रस्तावित बोर्ड यह यकीनी बनाएगा कि सिखों पर आधारित फिल्में सिख मर्यादा के मुताबिक ही बनें। बोर्ड में इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों के अलावा फिल्म माहिरों और वकीलों को भी शामिल किया जाएगा। मक्कड़ ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें भरोसा दिया है कि केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड में दो सिख मेंबरों को शामिल किया जाएगा।

इन फिल्मों पर हो चुका है विवाद
हाल ही में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख की फिल्म एमएसजी को लेकर काफी विवाद हुआ है। इससे पहले ‘जो बोले सो निहाल’, ‘सिंग इज किंग’ और ‘सन ऑफ सरदार’ जैसी फिल्मों को लेकर भी विवाद हुआ था। एक हिंदी टीवी सीरियल का नाम भी एसजीपीसी के निर्देश के बाद बदला गया था।
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मक्कड़ ने कहा कि हाल ही में प्रदर्शित एनिमेटेड फिल्म ‘चार साहिबजादे’ पूरी तरह एसजीपीसी की देखरेख में बनी। इसकेचलते कोई विवाद नहीं हुआ।
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