पानीपत के नवजीवन मेडिकेयर हॉस्पिटल में लगे कैंप में मोतियाबिंद के लापरवाही से ऑपरेशन करने के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी खो चुके 14 में से छह मरीजों की सर्जरी पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में कर दी गई है, लेकिन आठ मरीज अब भी गंभीर है।
उनकी आंखें इस कदर गल चुकी हैं कि सर्जरी लायक भी नहीं बची। आई सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. अमोद गुप्ता ने बताया कि सर्जरी के बाद मरीजों को एंटीबायोटिक दवा दी गई है। इसका रिजल्ट 48 घंटे के बाद ही आता है। इसके बाद ही पता चलेगा कि नेत्र ज्योति को कितना नुकसान हुआ है।
आठ मरीजों की हालत इतनी खराब है कि उनकी सर्जरी तक नहीं की जा सकती है। गुप्ता ने बताया कि मरीजों की आंखों को देखने के बाद कहा जा सकता है कि उनकी हालत काफी गंभीर थी। जांच के बाद ही इंफेक्शन की पुख्ता वजह के बारे में पता चलेगा।
बिना परमिशन के लगाया था कैंप
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कैंप लगाने के लिए सीएमओ से परमिशन नहीं ली गई थी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि डॉक्टरों ने गाइडलाइंस के मुताबिक कैंप लगाया या नहीं। सभी मरीजों के इलाज का सरकार वहन करेगी।
जांच में यह भी पता चला कि 11 मार्च को 19 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन नवजीवन हॉस्पिटल में किया गया। इनमें से 14 मरीजों का इलाज चंडीगढ़ में चल रहा है। जबकि चार मरीज पानीपत में भर्ती हैं। एक मरीज की आंख ठीक है।
सरकार उठाएगी इलाज का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने बताया है कि इस मामले में राज्य सरकार गंभीर है। सरकार की ओर से पीजीआई में भर्ती मरीजों के उपचार के मामले में जरूरी हिदायतें दी गई हैं। मरीजों के इलाज में जितना भी खर्च होगा वह सरकार वहन करेगी।
रिपोर्ट बताएगी किस स्तर पर हुई लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने बताया है कि पानीपत के सिविल सर्जन और एक नेत्र विशेषज्ञ डाक्टर 15 मार्च तक रिपोर्ट देकर बताएंगे कि इलाज में लापरवाही किस स्तर पर हुई है। यदि मामले में आपराधिक तथ्य सामने आते हैं तो कार्रवाई भी उसी आधार पर की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कैंप लगाने के लिए जिला प्रशासन व सिविल सर्जन की अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन इस निजी अस्पताल और एनजीओ ने इसके लिए जिला प्रशासन व सिविल सर्जन से कोई अनुमति नहीं ली।
दोषी साबित हुए तो कार्रवाई: विज
मरीजों का हाल जानने के लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी पीजीआई पहुंचे। उन्होंने कहा कि घटना की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है।
इसमें पानीपत के मेडिकल अधीक्षक एसके गुप्ता, पानीपत के उप सिविल सर्जन डॉ. शशि गर्ग, नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मेहता और माइक्रोबायोलाजिस्ट डॉ. प्रीति भाटिया को शामिल किया है।
न्यायिक जांच के लिए एसडीएम समालखा की अध्यक्षता में भी एक कमेटी गठित की गई है। जांच में अगर डॉक्टर की लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन थियेटर भी सील
आंखों का ऑपरेशन कराने के बाद रोशनी गंवाने के आरोपों के बीच प्रशासन ने नवजीवन मेडिकेयर हॉस्पीटल के ऑपरेशन थियेटर को सील करते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।