दुराचार मामले में जेल में कैद बिजनेसमैन मंजीत अरोड़ा के बेटे सिकंदर की ओर से दायर जमानत अर्जी पर शुक्रवार को अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश एसएस साहनी की अदालत में सुनवाई हुई।
अदालत ने सिकंदर की गिरफ्तारी पर 4 दिसंबर तक रोक लगाते हुए पुलिस को इसी दिन अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया। सिकंदर के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज है।
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इससे पहले पिछले वीरवार को यह मामला एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशन जज नाजर सिंह की अदालत में लगा था। सिकंदर के वकील एनएस बराड़ के अनुसार अदालत की ओर से पुलिस को शुक्रवार को अपना पक्ष रखने को कहा था।
लेकिन, अदालत ने मामले में सुनवाई करने से इंकार करते हुए मामला सेशंस कोर्ट को वापस भेज दिया। अदालत ने कहा कि मामले में उसी कोर्ट के नायब कोर्ट की ओर से शिकायत दी गई है इसलिए यहां सुनवाई नहीं हो सकती।
इसके बाद सेशंस कोर्ट ने यह मामला अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश एसएस साहनी की अदालत को सुनवाई के लिए भेज दिया। मालूम हो कि मामला दर्ज हो जाने के बाद से सिकंदर फरार चल रहा है।
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पिता को ले जाने से रोका था
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत के नायब कोर्ट हेड कांस्टेबल गुरशरण सिंह ने सोमवार को सिकंदर की शिकायत दी थी।
शिकायत में बताया था कि वह दुराचार मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद मंजीत अरोड़ा को बख्शीखाने में छोड़ने जा रहा था। कोर्ट के बाहर और सीढ़ियों पर सिकंदर ने उसका रास्ता रोका और बदतमीजी की।
सिकंदर ने बख्शीखाने के बाहर जमकर हंगामा भी किया। सेक्टर-36 थाना पुलिस ने हेड कांस्टेबल गुरचरण सिंह की शिकायत पर सिकंदर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मालूम हो कि सेक्टर-36 पुलिस सिकंदर की तलाश में छापामार कार्रवाई भी कर चुकी है।
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सिकंदर के पिता को है 12 साल की कैद
नौकरानी से दुराचार मामले में सिकंदर के पिता मंजीत अरोड़ा को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाजर सिंह की अदालत ने 12 साल की कैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा पीड़िता को एक लाख रुपये हर्जाना और दस हजार रुपये जुर्माना देने का भी आदेश दिया था।