ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर 200 रुपये रिश्वत लेने वाले क्लर्क और उसके सहायक को अदालत ने दोषी करार देते हुए चार-चार साल कैद की सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत चल रही थी।
गांव थाना कलां निवासी राजीव ने 19 दिसंबर, 2014 को विजिलेंस को शिकायत दी थी। उसने उसने खरखौदा तहसील में ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सभी कागजात जमा कराए थे। वह कई दिन से प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तहसील कार्यालय में चक्कर काट रहा था। जब वह क्लर्क रमेश चंद्र से मिला तो उसने ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में 200 रुपये की मांग की। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद नायब तहसीलदार रवींद्र मलिक ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
विजिलेंस टीम ने राजीव कुमार को 200 रुपये देकर रिश्वत देने के लिए भेजा और खुद कार्यालय के पास खड़ी हो गई। राजीव कुमार ने रमेश चंद्र के सहायक प्रदीप को रिश्वत देने के बाद विजिलेंस टीम को बुला लिया था। टीम ने प्रदीप को मौके से रिश्वत की राशि समेत काबू किया था। प्रदीप ने विजिलेंस टीम को बताया था कि उसे रमेशचंद्र ने अपने साथ रखा हुआ है। वह ओबीसी प्रमाणपत्र देने की एवज में लोगों से 200 रुपये लेता है। इसके बदले में उसे क्लर्क रमेशचंद्र कुछ हिस्सा दे देता है। बाद में टीम ने क्लर्क रमेश चंद्र को भी काबू कर लिया था। मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय तेवतिया की अदालत ने रमेशचंद्र और प्रदीप को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।