भारतीय जनता युवा मोर्चा के पश्चिमी मंडल के अध्यक्ष के घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी गई। पहले पेट में गोली मारी गई और उसके बाद तलवार से सिर पर कई वार हुए। इतना ही नहीं छोटे भाई व पिता को भी तलवार के वार से घायल किया गया। वारदात रविवार देर रात करीब दो बजे हुई। नेता के पड़ोसियों पर ही हत्या के आरोप हैं, जिनसे पहले भी कई बार झगड़ हो चुके हैं। एमडीसी थाने में हत्या का मामला दर्ज कर छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
वहीं भाजपा के स्थानीय नेताओं व पुलिस के बीच एमडीसी थाने में सोमवार सुबह जमकर बवाल हुआ। भाजपा का आरोप था कि पूर्व में पुलिस ने ठोस कदम उठाए होते तो यह नौबत न आती। भाजपा ने मंगलवार को पंचकूला बंद का एलान किया है।
एमडीसी थाने में हंगामा किया और नारेबाजी
मौके से मिली जानकारी के मुताबिक आशुतोष भारद्वाज अपने युवा भाजपा नेता थे और सकेतड़ी में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके पड़ोस में ही रहने वाले हुड्डा परिवार से विवाद चल रहा था। पहले भी दोनों परिवार के बीच कई बार झगड़े हो चुके हैं। आशुतोष के छोटे भाई राहुल के मुताबिक वह दोनों घर की पहली मंजिल पर सोए हुए थे।
रात को उसे जोर का शोर सुनाई दिया। देखा तो उसके बराबर में सो रहे आशुतोष की कमर पर गोली मारी गई। इससे पहले की वह कुछ समझ पाता हमलावरों ने आशुतोष के सिर पर तलवार से जोरदार वार किए। दूसरे हमलावर ने उसके भी सिर पर तलवार मारी। इस बीच उसके पिता कृष्ण भारद्वाज भी ऊपर आए गए। सभी हमलावर भागने लगे उसके पिता की टांग पर भी वार किया गया। राहुल के मुताबिक किसी तरह उसने एक हमलावर को दबोच लिया और बाथरूम में बंद कर दिया। बुरी तरह घायल को सेक्टर-6 स्थित जनरल अस्पताल पहुंचाया, जिसे पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई।
आरडी स्वामी सहित कई अन्य पर आरोप
इस वारदात के लिए आशुतोष के पड़ोस में ही रहने वाले अरूण हुड्डा, उसके भाई तरूण हुड्डा, पिता जोरावर हुड्डा, मां सरोज हुड्डा व मंदिर संचालक आरडी स्वामी सहित कई अन्य पर आरोप हैं। पुलिस ने उक्त सभी के अलावा बाथरूम में बंद किए गए हमलावर को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसका नाम इकबाल बताया जा रहा है।
थाने का हो गया घेराव
सकेतड़ी निवासी व कई भाजपा नेता एमडीसी थाने में जमा हो गए और पुलिस के खिलाफ जमकर बवाल काटा। लोगों का कहना था कि पूर्व में हुए झगड़ों में पुलिस कभी समझौता करा देती तो दोनों पक्षों का चालान कर देती।
अगर ठोस कदम उठाए होते तो ऐसा न होता। हालांकि पुलिस ने सुबह ही चार आरोपियों को पकड़ लिया था। क्राइम ब्रांच जब आरोपियों को थाने से गाड़ी में लेकर जाने लगी तो लोगों ने पुलिस की गाड़ी पर हमला किया और शीशे तोड़ दिए। किसी तरह गाड़ी को निकालकर आरोपियों को क्राइम ब्रांच तक पहुंचाया गया।