पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी आतंकी जगतार सिंह तारा के खिलाफ शुक्रवार को केस का ट्रायल शुरू हो गया। तारा पर धारा 268 लगी होने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सकता। इसलिए केस की सुनवाई बुड़ैल जेल में ही विशेष अदालत में हुई।
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पहले दिन सीबीआई के तत्कालीन एसपी एके ओहरी के बयान दर्ज किए गए। इसके अलावा अगली सुनवाई के लिए एक सीबीआई अफसर, यूटी के दो पूर्व डीएसपी (तत्कालीन इंस्पेक्टर) और गुजरात के सीएफएसएल अधिकारी को समन भेजे गए हैं।
पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या के मामले में आरोप तय होने से पहले ही आतंकी जगतार सिंह तारा बुड़ैल जेल से फरार हो गया था। मामले में अन्य दोषियों के खिलाफ ट्रायल पूरा हो चुका है और उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है। तारा की पिछले साल जनवरी में थाईलैंड से गिरफ्तारी की गई थी।
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इससे पहले उसके फरार होने के बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ केस का ट्रायल पूरा होने के बाद सारा रिकार्ड सुप्रीम कोर्ट में जमा हो गया था। तारा की गिरफ्तारी के बाद केस से जुड़ा सारा रिकार्ड मंगाया गया था। इस कारण तारा के खिलाफ केस का ट्रायल शुरू होने में लंबा वक्त लग गया।
बुड़ैल जेल की विशेष अदालत में हुए बयान
जगतार सिंह हवारा
- फोटो : file photo
शुक्रवार को बुड़ैल जेल की विशेष अदालत में दिल्ली सीबीआई के पूर्व एसपी ओहरी ने बताया कि उन्होंने इस हत्याकांड को लेकर 3 से 4 गवाहों के बयान लिए थे। साथ ही मौके से 3-4 सबूत एकत्र किए थे। इसके अलावा उन्होंने केस की जांच से जुड़े कई अन्य तथ्य पेश किए। वहीं ओहरी के बयान के बाद तारा ने अपने एडवोकेट से उनका क्रास एग्जामिनेशन कराने से इंकार कर दिया।
अगली सुनवाई जुलाई अंत में
अदालत ने केस की जांच से जुड़े यूटी पुलिस के दो तत्कालीन इंस्पेक्टरों (बाद में डीएसपी बने) नने राम और विजय कुमार, सीबीआई से एडिशनल एसपी रिटायर्ड (तत्कालीन इंस्पेक्टर) एजीएल कौल और गुजरात में सीएफएसएल अधिकारी रहे सीएम पटेल को अगली सुनवाई के लिए समन जारी किए हैं। हालांकि इनमें से विजय कुमार और एजीएल कौल की मृत्यु हो चुकी है। इस पर अदालत ने इसका वेरिफिकेशन कराने के आदेश दिए हैं। केस की अगली सुनवाई जुलाई अंत में होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा जगतार सिंह हवारा
- फोटो : फाइल फोटो
31 अगस्त 1995 को पंजाब सिविल सचिवालय की बिल्डिंग के पास हुए बम ब्लास्ट में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की मौत हो गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलवार सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। इस हत्याकांड में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआणा को पटियाला जेल में 31 मार्च 2012 को फांसी देने के वारंट अदालत ने जारी किए थे। हालांकि किन्हीं कारणों से केंद्र सरकार ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी।
जेल ब्रेक में अदालत दो को सुना चुकी है सजा और 14 को बरी
बुडै़ल जेल ब्रेक केस में सीजेएम कोर्ट ने 11 अगस्त को आतंकी जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा को दोषी करार दे चुकी है। हालांकि उनकी सजा को कोर्ट ने अंडरगॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया था। दोनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य थे। इसके अलावा जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह को कोर्ट सबूतों के अभाव में बरी कर चुकी है।