हाईकोर्ट ने डेढ़ किलो अफीम और पांच किलो चरस के साथ पकड़े आरोपी बुधराम को मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया है। उसे 20 वर्ष कठोर कारावास तथा 4 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने विशेष न्यायाधीश मंडी के फैसले को पलटते हुए यह सजा सुनाई।
सात जनवरी, 2010 को पुलिस ने सदर मंडी में पेट्रोलिंग और नाकेबंदी के दौरान दोषी बुधराम को 1500 ग्राम अफीम, पांच किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया था। 11 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोषी का दोष साबित नहीं कर पाया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने दोषी को सजा सुनाई।
तीन किलो चरस के साथ पकड़े दोषी को 15 साल कैद
हाईकोर्ट ने हरियाणा रोडवेज की बस में 5 जनवरी, 2010 की रात 3 किलो 300 ग्राम चरस के साथ पकड़े ज्ञान चंद को मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया है। उसे 15 वर्ष कठोर कारावास तथा 2 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने विशेष न्यायाधीश सोलन के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किए।
पांच जनवरी, 2010 को पुलिस ने परवाणू के समीप हरियाणा रोडवेज की बस की जांच की तो पाया कि सीट नंबर 23 के नीचे एक बैग दोषी के पांव के बीच था। दोषी के हड़बड़ाने पर पुलिस को शक हुआ। बैग की जांच करने पर उसमें चरस पाई गई। 14 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोष साबित नहीं कर पाया।
मामले में जांच करने वाले कुछ पुलिस कर्मी और हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी अपने बयानों से मुकर गए थे। हाईकोर्ट ने इसी मामले में दिए फैसले में सरकार को आदेश दिए हैं कि वह आपराधिक मामलों की जांच के दौरान गवाहों के बयानों की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करें। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसे स्वीकार कर कोर्ट ने दोषी को सजा सुनाई है।
आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी को सात साल कैद
हिमाचल हाईकोर्ट
हिमाचल हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पवन कुमार को 7 साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला के उसे बरी करने वाले फैसले को पलट दिया है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर यह सजा सुनाई।
19 जुलाई, 2008 को पवन कुमार की रोज-रोज की अपहरण की धमकियों और छेड़खानियों से तंग आकर शालू ने खुद को आग के हवाले कर दिया था। शालू को जली हुई अवस्था में देहरा अस्पताल और फिर पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। शालू के पिता की माली हालत ठीक न होने के कारण उसे वापस देहरा लाना पड़ा।
24 जुलाई को शालू ने लिखित बयान में उसकी मौत के लिए पवन कुमार को दोषी ठहराने की बात लिखी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। पवन कुमार पर इससे पहले शालू के साथ दुष्कर्म करने के आरोप लगे थे। मामले में वह 11 महीने जेल में रहा और बरी हो गया था। जेल से छूटने के बाद वह अकसर पीड़िता को अपहरण की धमकी देता था।
अश्लील हरकतें कर उसके परिवार वालों के सामने छेड़ा करता था। इससे तंग आकर शालू ने मौत को गले लगा लिया। दोषी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने के लिए सत्र न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला के समक्ष 14 गवाह पेश किए गए थे। निचली अदालत ने 16 जुलाई, 2010 को पवन कुमार को बरी कर दिया था। सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
तीन आरोपियों को 18 को सुनाएंगे सजा
हाईकोर्ट ने 4 किलो 500 ग्राम चरस के साथ पकड़े आरोपियों सुरेंद्र कुमार, तारा चंद और मनीराम को मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने विशेष न्यायाधीश किन्नौर डिवीजन रामपुर के फैसले को पलट कर यह आदेश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार 6 नवंबर, 2006 को पुलिस ने लुहरी के पास कोटनाला में पेट्रोलिंग और नाकेबंदी के दौरान दोषियों को 4 किलो 500 ग्राम के साथ गिरफ्तार किया था। 11 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में दोष साबित नहीं कर पाया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। इसे स्वीकार कर कोर्ट ने दोषी को मामले में 18 जुलाई 2016 को सजा सुनाने का फैसला सुनाया है।