कथावाचक आसाराम बापू पर दुराचार के आरोपों में मुख्य गवाह महेंद्र चावला पर पानीपत में हमला करने वाले दोनों शूटरों को नारायण साईं ने महेंद्र चावला को मारने के आदेश दिए थे। उसने साफ तौर पर कहा था कि चावला किसी भी सूरत में बचना नहीं चाहिए। हमलावर पश्चिम बंगाल से थे। सदर थाना पुलिस को नारायण साईं से की गई पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। अब पुलिस आरोपियों की धरपकड़ में जुट गई है।
नारायण साईं से रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में पुलिस को कई अहम सबूत हाथ लगे हैं। पुलिस के अनुसार नारायण साईं ने शूटरों को साफ आदेश दिया था कि महेंद्र चावला किसी भी सूरत में बचना नहीं चाहिए। शूटर पश्चिम बंगाल से थे। दोनों आसाराम बापू और नारायण साईं के अनुयायी थे और उनके गुजरात स्थित आश्रम में रहते थे। हालांकि नारायण साईं स्वयं मामले में बेगुनाह बता रहा है।
पानीपत में रहकर की थी रेकी
दोनों शॉर्प शूटर 11 मई 2015 को पानीपत पहुंचे थे। वे दो दिन तक पानीपत के ही एक होटल में ठहरे थे। उन्होंने 11 और 12 मई को महेंद्र चावला के घर की रेकी की थी। 13 मई को दोनों शूटर बाइक पर सवार होकर सनौली पहुंचे थे। दोनों ने महेंद्र चावला पर हमले का समय सुबह 10 बजे चुना था। उन्हें पता था कि महेंद्र चावला 11 बजे तक घर पर रहता है।
दोनों शूटर 13 मई को साढ़े दस बजे महेंद्र चावला के घर के समीप पहुंचे। एक शूटर नीचे बाइक के पास रुक गया। दूसरा शूटर सीढ़ियों से ऊपर चला गया। शूटर ने महेंद्र चावला को देखते ही गोली मार दी। गोली लगने के बाद चावला छत से नीचे कूद गया। दोनों शूटर बाइक पर सवार होकर मौके से भाग गए। शूटरों को पता था कि उनका निशाना चूक गया है।
इसकी जानकारी उन्होंने गुजरात स्थित आश्रम में भी दी थी। आश्रम से दोनों को कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड होने का आदेश मिला था। पुलिस नारायण साईं से पूरे मामले के बारे में पूछताछ कर रही है। वहीं नारायण साईं ने पूरे मामले में खुद को बेगुनाह बताया है। थाना सदर पुलिस नारायण साईं को दो मार्च को कोर्ट में पेश करेगी।