हरियाणा नूंह में हुई हिंसा की विस्तृत जांच अभी जारी है, लेकिन एक बात साफ हो गई है कि साइबर पुलिस थाने पर किया गया हमला सुनियोजित था। हरियाणा पुलिस का दावा है कि यह हमला अप्रैल माह में साइबर अपराधियों पर हुई छापेमारी के बाद जुटाए गए सबूतों को नष्ट करने के लिए किया गया था। हालांकि, उपद्रवी इसमें कामयाब नहीं हो सके।
नूंह जिला में साइबर क्राइम को अपना पेशा बनाने वाले अपराधियों पर नकेल कसने के लिए हरियाणा पुलिस बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है। अप्रैल माह में पुलिस ने नूंह में साइबर जालसाजों के ठिकानों पर एक साथ रेड कर देश भर में लगभग 100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा किया था।
यह भारत में अपनी तरह की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी थी और इसमें कुल 5,000 जवान और अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने नूंह जिले के 14 गांवों में फैले 320 साइबर अपराधियों के ठिकानों पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान 65 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और अन्य 25 साइबर अपराधियों को छापेमारी से पहले और छापेमारी के बाद की अवधि में गिरफ्तार किया गया।
इस दौरान 66 मोबाइल डिवाइस और 5 माइक्रो एटीएम मशीनों सहित बड़ी संख्या में आईटी डिवाइस जब्त किए गए। 739 फर्जी सिम, 307 फर्जी बैंक खाते और 199 यूपीआई हैंडल के विवरण सहित कई फर्जी दस्तावेजों का खुलासा हुआ।
हरियाणा सरकार के प्रवक्ता के अनुसार पुलिस का मानना है कि पिछले दिनों नूंह में हुई हिंसा की आड़ में इस छापेमारी के दौरान जुटाए गए सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई। नूंह का ये साइबर पुलिस स्टेशन दो साल पहले ही बन कर तैयार हुआ है। साइबर स्टेशन में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और दूसरे आपराधिक दस्तावेज थे और उपद्रवियों का मकसद इनको को बर्बाद करना था।
गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं। हर पुलिस स्टेशन में एक, कुल मिलाकर 318 साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए हैं। इन पर लगभग 700 प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। राज्य में 29 साइबर पुलिस स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन - 1930 को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली अर्थात डायल-112 के साथ एकीकृत किया गया है। पंचकूला में एक राज्य स्तरीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र स्थापित किया है।