फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेरा सच्चा सौदा में हथियारों की ट्रेनिंग, हाईकोर्ट सख्त

Tue, 02 Dec 2014 02:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
सिरसा के डेरा सच्चा सौदा में हथियारों का प्रशिक्षण दिए जाने संबंधी मामले का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका के रूप में दाखिल करने की सिफारिश की है।
विज्ञापन


हिसार के सतलोक आश्रम से हथियार मिलने के बाद एमिकस क्यूरी ने हाईकोर्ट को डेरा सच्चा सौदा में हथियारों का प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी देते हुए आर्मी इंटेलिजेंस की ओर से जारी एक एडवाइजरी पेश की थी।

एमिकस क्यूरी ने सभी डेरों की जांच की सलाह भी दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया था। डेरा सच्चा सौदा संबंधी रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को हाईकोर्ट ने कहा कि डेरों और आश्रमों को हथियारों और बारूद का डंपिग ग्राउंड न बनने दिया जाए।
विज्ञापन

अदालत ने अधिकारियों को डेरे की जांच की सलाह भी दी

जस्टिस एम. जियापाल और जस्टिस दर्शन सिंह की डिवीजन बेंच ने इस मामले में चीफ जस्टिस के समक्ष जनहित याचिका चलाने की सिफारिश करते हुए कहा कि डेरा सिरसा में हथियारों के प्रशिक्षण की रिपोर्ट के मद्देनजर देश की सुरक्षा के लिए जनहित याचिका चलाई जानी चाहिए। अदालत ने अधिकारियों को डेरे की जांच की सलाह भी दी।

रामपाल केस का हवाला देते हुए बेंच ने अपनी सिफारिश में कहा कि सतलोक आश्रम में मिले हथियारों के मद्देनजर डेरा सच्चा सौदा बारे आर्मी इंटेजिलेंटस की रिपोर्ट को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकता है। इससे बचने के लिए डेरों की समय-समय पर जांच जरूरी होनी चाहिए। डेरों व आश्रमों को हथियार प्रशिक्षण स्थल नहीं बनने देना चाहिए।

अगर इस स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया हालात रामपाल केस जैसे बन सकते हैं। बेंच ने कहा कि आश्रमों की सुरक्षा के लिए निजी सेना और हथियारों का प्रशिक्षण न केवल न्यायपालिका, बल्कि राज्य के लिए भी बड़ी चुनौती है।

पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से

बीते सप्ताह रामपाल मामले में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने डेरा सच्चा सौदा पर आर्मी रिपोर्ट के साथ ही हाईकोर्ट द्वारा पूछे जाने पर डेरामुखी गुरमीत राम रहीम के खिलाफ चल रहे बलात्कार और हत्या के अलावा करीब 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के मामलों की जानकारी भी कोर्ट को दी गई थी।

सोमवार को डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका की सिफारिश करते हुए गुरमीत राम रहीम की अदालतों में जारी पेशियों का भी जिक्र किया। डिवीजन बेंच ने कहा कि गुरमीत राम रहीम की पेशियों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होने से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े प्रबंध करने पड़े। इसी वजह से पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करानी पड़ रही हैं।

संत राम रहीम की अर्जी फिर अन्य बेंच को रेफर

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत में और गवाहियां दर्ज कराने की मांग संबंधी अर्जी एक बार फिर अन्य बेंच को रेफर कर दी गई है। सोमवार को यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस शबीना की बेंच के पास सुनवाई के लिए आया, जिसे उन्होेंने सुनवाई से इनकार कर दिया।

गुरमीत राम रहीम के एडवोकेट एसके गर्ग नरवाना ने अर्जी दायर कर कहा था कि सीबीआई अदालत का गवाहियां बंद करने का फैसला गलत है। इस फैसले को चुनौती देते हुए और गवाहियां कराने की मांग की गई। अर्जी के मुताबिक इस मामले में राम रहीम कु छ और तथ्य पेश करना चाहते हैं। पहले इस अर्जी पर हाईकोर्ट के जस्टिस अनूपइंद्र सिंह ग्रेवाल ने सुनवाई से इनकार करते हुए इसे अन्य बेंच को रैफर कर दिया था।

जस्टिस ग्रेवाल ने कहा था कि एएजी पद पर रहते हुए वे पंजाब सरकार की ओर से गुरमीत राम रहीम से जुड़े एक केस में बठिंडा में पेश होते रहे हैं, इसलिए वे इस अर्जी को नहीं सुनेंगे। अन्य बेंच के तौर पर जस्टिस शबीना की कोर्ट में पहुंची अर्जी को फिर से अन्य बेंच के लिए रैफर कर दिया गया है।
विज्ञापन

साध्वियों के यौन शोषण का है डेरामुखी पर आरोप

जिस मामले में गुरमीत राम रहीम सीबीआई कोर्ट में और गवाह पेश करना चाह रहे हैं, उसमें वह डेरे की साध्वियों से बलात्कार के आरोपी हैं। यह मामला सीबीआई जांच के बाद पंचकूला की विशेष अदालत में विचाराधीन है।

हाईकोर्ट को एक पत्र प्राप्त हुआ था कि डेरे में साध्वियों से बलात्कार किया जाता है, लिहाजा सीबीआई जांच की जानी चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें