तस्वीर में दिख रही लोगों की लाइन राशन डिपो के बाहर राशन लेने की नहीं, ब्लकि ठेके के बाहर नशा खरीदने वालों की है। ये लाइन खुद पुलिस लगवा रही है। मामला पोस्त का है।
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पड़ोसी शहर श्रीगंगानगर सहित पूरे राजस्थान में पहली बार पोस्त का अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हो गया है। इसके चलते रविवार को श्रीगंगानगर में सैकड़ों की तादाद में पोस्त का सेवन करने वाले लोग उमड़ पड़े।
पंजाब और हरियाणा से भी नशेड़ी बसों और अन्य वाहनों से पहुंचे, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई। पोस्तियों ने पहले नेशनल हाईवे पर हंगामा करते हुए जाम लगा दिया। इसके बाद केंद्रीय बस अड्डे के सामने मिनी मायापुरी ऑटो मोबाइल मार्केट में आ जुटे। यहां भी पोस्त के लिए हंगामा करने पर पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी।
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ठेकेदारों ने तीन गुणा कीमती वसूली
सूरतगढ़ बाईपास स्थित और मिनी मायापुरी मार्केट के ठेकों पर पुलिस ने कतारें लगवाकर पोस्त को राशन की तरह बिकवाया। ठेकेदारों ने तीन गुणा कीमती वसूली, पुलिस इस ब्लैक के सामने लाचार रही।
दोनों जगहों पर व्यवस्थित तरीके से बिक्री करवाने के लिए पुलिस के जवानों को जूझना पड़ा। पोस्तियों की दो-दो, तीन-तीन किमी लंबी लाइनें लग गईं। पोस्त का सेवन करने वाली महिलाओं के लिए अलग से कतार लगानी पड़ी। फिरोजपुर से भी कई नशेड़ी पोस्त लेने गए थे। यही नहीं पंजाब पुलिस के अनेक जवान भी बावर्दी पोस्त लेने के लिए कतारों में लगे हुए दिखाई दिए।
पोस्त का यह अभूतपूर्व संकट विगत एक अप्रैल से नए ठेकेदारों द्वारा ठेके संभालने के बाद से चल रहा है, जो दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। आबकारी विभाग के अधिकारी इसमें कुछ नहीं कर रहे। पुलिस का कहना है कि पोस्त उत्पादक क्षेत्रों में इस बार पोस्त की काफी कमी है। लगातार कमी होने से ठेकेदारों ने पोस्त के भाव बढ़ा दिए।
सरकार ने न्यूनतम 500 रुपये प्रतिकिलो भाव तय कर रखा है। 31 मार्च से पहले भाव 700-800 रुपये किलो था। इसके बाद भाव बढ़ते-बढ़ते शनिवार शाम 3500 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गए। इसके बाद पोस्तियों का सब्र टूट गया।
100-100 ग्राम पोस्त की दो थैलियां 300 रुपये में
कानूनन ठेकेदार सिर्फ परमिटधारी व्यक्ति को ही पोस्त बेच सकते हैं। लेकिन परमिटधारी पोस्तियों से कई गुणा ज्यादा बिना परमिट वाले पोस्ती हैं। इनमें अधिकतर पंजाब और हरियाणा के हैं, जो या तो राजस्थान के श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में आकर पोस्त चोरी छिपे ले जाते हैं अथवा यहीं पर बस जाते हैं।
ऐसे बिना परमिट वाले पोस्तियों को पोस्त ब्लैक में खरीदना पड़ता है। अब एक अप्रैल के बाद से जिनके पास परमिट हैं, उन्हें भी ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है।
शनिवार शाम के हंगामे के बाद रविवार सुबह पुलिस ने कमान संभाल ली। सूरतगढ़ रोड बाईपास ठेके पर हंगामा होने पर पुलिस ने पोस्तियों की लाइन लगवाई। मिनी मायापुरी मार्केट में दो तरफ से लाइनें लगवाई गई, जो दो किमी लंबी हो गईं।
कोतवाल विष्णु खत्री तथा पुरानी आबादी थाना प्रभारी धीरेंद्र सिंह शेखावत की अगुवाई में लगभग 50 पुलिसकर्मियों को यहां ड्यूटी पर लगाया गया। इस ठेके पर एक पोस्ती को 100-100 ग्राम पोस्त की दो थैलियां 300 रुपये में दी गई। लिहाजा पांच सौ की जगह 1500 रुपये किलोग्राम पोस्त पुलिस की ही मौजूदगी में बेचा गया। किसी से भी परमिट दिखाने को नहीं कहा गया।
इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों का कहना था कि पोस्त न मिलने की वजह से पोस्तियों की हालत को देखते हुए इसके सिवाय कोई चारा नहीं है। कम से इन पोस्तियों को पोस्त मिल तो रहा है।
उल्लेखनीय है कि श्रीगंगागनर में पोस्त न मिलने की वजह से 10 दिन पहले घड़साना में एक वृद्ध की मौत हो गई जबकि पिछले सप्ताह बलकरण सिंह नामक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पोस्त की किल्लत की यह स्थिति में श्रीगंगागनर में ही नहीं है बल्कि हनुमानगढ़, बीकानेर, पंजाब, फिरोजपुर और सांचोर आदि जिलों में भी है।
फिरोजपुर में भी चूरापोस्त का सेवन करने वाले नशेड़ियों को पोस्त नहीं मिलने से बीमार पड़ रहे हैं। क्योंकि इसे खाकर ही कामकाज करते हैं। इन दिनों गेहूं की कटाई चल रही है, यही ऐसे दिन है जब पोस्त सबसे अधिक बिकती है।