शिमला की युवती से दुराचार के मामले में फंसे चंडीगढ़ के पूर्व गृह सचिव समेत पांच लोगों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत ने पीड़ित द्वारा बयानों से मुकरने पर 12 साल बाद बरी कर दिया।
बरी होने वालों में पूर्व गृह सचिव एनके जैन, रामलाल, सुरेंद्र शर्मा, बदलेव कुमार और हेड कांस्टेबल नरवीर सिंह है।
हिमाचल स्थित शिमला की युवती 14 अगस्त 2002 को सेक्टर 33 के पेट्रोल पंप पर बेहोशी की हालत में गिरी मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित को अस्पताल में दाखिल करवाया था।
पीड़ित ने बयानो में कहा था कि उसके साथ उद्योगपति एमके जैन ने दुराचार किया था। पुलिस ने जब मामले की जांच की तो पता चला कि पीड़ित के साथ दुराचार उद्योगपति एमके जैन ने नहीं किया था। बल्कि पूरी साजिश पूर्व गृह सचिव एनके जैन, रामलाल, सुरेंद्र शर्मा, बदलेव कुमार और हेड कांस्टेबल नरवीर सिंह ने रची थी।
छानबीन में बताया कि पूर्व गृह सचिव एनके जैन ने दुश्मनी केचलते उद्योगपति को फंसाया था।
पुलिस ने मामले में उद्योगपति को सरकारी गवाह बनाकर पूर्व गृह सचिव एनके जैन समेत चारों के खिलाफ सामूहिक दुराचार, साजिश रचने और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्जकर उन्हें गिरफ्तार किया था।
उद्योगपति समेत दो दुराचार मामले में बरी
शिमला की युवती से दुराचार मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की अदालत ने सोमवार को उद्योगपति एमके जैन और मनोजपाल गोदरा को सबूतों के अभाव के चलते बरी कर दिया।