पीओ सेल के जवानों ने खुद साधु बनकर आरोपी को दबोचा
करीब 37 सालों से यूटी पुलिस आरोपी आनंद कुमार को तलाश कर रही थी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग रहा था। पुलिस उसके पैतृक गांव में भी पूछताछ कर रही थी और इसी दौरान अप्रैल 2024 में पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी आनंद यूपी के एक आश्रम में साधु बनकर रह रहा है।
14 अप्रैल 2024 को पीओ सेल के जवान खुद साधु के भेष में यूपी के काशगंज में गंगा नदी किनारे स्थित एक आश्रम में पहुंचे। जवानों ने आश्रम में पहुंचकर एक गाय दान करने की बात कही और कहा कि उन्हें आनंद कुमार से मिलना है। इस दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी ने अपना नाम आनंद कुमार से बदलकर देव आनंद रख लिया है। जैसे ही भगवा रंग के कपड़े पहने साधु बना आरोपी जवानों के सामने पहुंचा तो उसे उसी समय दबोच लिया और उसे फिर चंडीगढ़ लाया गया।
बच्चे की मौत की चश्मदीद गवाह मां ही आरोपी को नहीं पहचान पाई
बच्चे की हत्या के इस मामले में खुद उसकी मां विद्यावती चश्मदीद गवाह थी। पुलिस ने आरोपी आनंद कुमार के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया और बताया कि हत्या के बाद वह पुलिस से छिपने के लिए कहां-कहां रहा। बल्कि खुद पुलिस ने आरोपी के इंकसाफ में भी उसके द्वारा हत्या की बात को कबूलना बताया।
लेकिन अब 61 वर्षीय आरोपी आनंद को जब कोर्ट में पेश किया गया और चश्मदीद गवाह मृतक बच्चे की मां को गवाही के लिए बुलाया गया तो वह आरोपी को ही पहचान नहीं पाई। महिला ने कहा कि आरोपी काफी जवान था लेकिन अब जो उसके सामने खड़ा है, वह अधेड़ उम्र का व्यक्ति है जिसे वह नहीं पहचानती है। इसलिए कोर्ट ने संदेह के आधार पर आरोपी आनंद कुमार को हत्या के मामले में बरी कर दिया है।