जिस परिवार के पांच लोगों की एक ही दिन में मौत हुई हो, उस परिवार पर क्या गुजर रही होगी, उसका अंदाजा लगाना ही मुश्किल है। कैसे हालत में वो दोनों भाई अपने बच्चों को देख रहे होंगे, जिनकी पत्नियां हादसे के कारण असमय काल का ग्रास बन गईं। हंसते-खेलते परिवार की खुशियां कुछ ही पल में ही काफूर हो गई। अगर इस हादसे पर गौर से नजर डालें तो पता चलेगा कि इन पांच मौतों का आंकड़ा कम हो सकता था, अगर समय पर इलाज मिल जाता। जिस टाटा ऐस (छोटा हाथी) में सवार होकर सतपाल और श्याम लाल अपने भाई प्रेम, मामा श्याम सिंह तथा बीवी-बच्चों सहित जा रहा था, वो पीछे से आ रहे तेज रफ्तार गाड़ी की टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर पलट गया।
तीन बार उनकी गाड़ी पलटी और तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। तीनों की मौत गाड़ी के नीचे दबने से हुई। इसमें 3 माह का रितिक, प्रेम और श्याम सिंह शामिल थे। हादसे में सतपाल, श्यामलाल इनकी पत्नी मीना और माया और 6 अन्य बच्चे घायल हो गए थे। इसमें मीना और माया गंभीर रूप से घायल थीं। जब तक इन्हें गाड़ी के नीचे से निकालकर गन्नौर से सोनीपत नागरिक अस्पताल लाया गया, तब तक काफी देर हो गई थी।
मीना और माया ने अस्पताल में अपनी कुछ सांसें गिनीं। इन दोनों की जिंदगी बचाई जा सकती थी, अगर इन्हें समय पर इलाज मिल जाता। अस्पताल में डॉक्टर माया को रेफर करने की बात कर रहे थे, लेकिन जब तक उसे रेफर करते तब तक वह दम तोड़ चुकी थी। जबकि मीना को तो खानपुर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर भी दिया गया था, लेकिन परिवार में बचे श्यामलाल और सतपाल ने मीना को ले जाने से ही मना कर दिया। इतनी देर में मीना ने भी दम तोड़ दिया।
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6 बच्चों के सिर से उठा मां का साया
सतपाल की पत्नी मीना और श्यामलाल की पत्नी माया के कुल मिलाकर 7 बच्चे थे। सबसे छोटा रितिक तो हादसे में जान गवां चुका है, लेकिन अब बाकी बचे 6 बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह से सतपाल और श्यामलाल पर आ चुकी है। मनोज, मोहित, सनी, सुमन, काजल, कामना, मोनू के ऊपर से मां का साया उठ गया है। 5 साल का मोनू सब भाई-बहनों में सबसे बड़ा है, जबकि सबसे छोटी एक वर्षीय सुमन है। अस्पताल में जब इन्हें होश आया तो इनका एक ही सवाल था कि मां कहां है, लेकिन इनके इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।