देश में आने वाले विदेशी मेहमान वीजा नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। तमाम विदेशी मेहमान यहां आते ही गायब हो जाते हैं और वापस जाने का नाम नहीं लेते। वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी 74600 विदेशी भारत में छिपकर रह रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास ऐसे विदेशियों का डाटा है लेकिन इन्हें वापस भेजने के लिए कुछ नहीं किया जा सका। इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों का अवैध तरीके से रहना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ है।
सबसे ज्यादा मुस्लिम देशों के
एडवोकेट राजेश शर्मा ने आरटीआई के तहत गृह मंत्रालय से जानकारी मांगी थी। गृह मंत्रालय से मिली सूचना के मुताबिक मुस्लिम देशों से आकर यहां छिपकर रहने वाले लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है।
बांग्लादेश से 15314, अफगानिस्तान से 3540, पाकिस्तान से 5048, दक्षिण कोरिया से 2337, तंजानिया से 3924 और इराक से 4121 लोग देश में छिपकर रह रहे हैं। अमेरिका के भी साढ़े पांच हजार नागरिक वाजी खत्म होने के बाद भारत में छिपे हैं।
उनके वीजा की अवधि समाप्त हुए एक साल से ज्यादा हो गया है, लेकिन वे वापस नहीं लौटे। यह मुद्दा राज्यसभा के शीतकालीन सत्र में उठ चुका है, लेकिन इन्हें खोजकर वापस भेजने के लिए कुछ नहीं किया गया।
इन देशों के इतने नागरिक छिपे हैं
अफगानिस्तान के 3540, अंगोला के 104, आस्ट्रेलिया के 454, बांग्लादेश के 15314, बेल्जियम के 133, ब्राजील के 110, कैमरून के 219, कनाडा के 1078, चीन के 731, कांगो के 687, एरिट्रिया के 259, इथियोपिया के 610, फिजी के 150, फिनलैंड के 115, फ्रांस के 1068, जर्मनी के 918, इंडोनेशिया के 246, ईरान के 790, इराक के 4121, इटली के 262 हैं।
आइवरी कोस्ट के 232, जापान के 826, केन्या के 1395, साउथ कोरिया के 2337, मलयेशिया के 958, मालदीव के 242, मॉरीशस के 496, मंगोलिया के 127, म्यांमार के 1271, नीदरलैंड के 208, न्यूजीलैंड के 101, नाइजीरिया के 2039, नार्वे के 140, ओमान के 1385, पाकिस्तान के 5048, फिलीपींस के 323, तिब्बत रिफ्यूजी 239, रूस के 516, रवांडा के 270, सऊदी अरब के 242, चिली के 716, सिंगापुर के 338, सोमालिया के 700, स्पेन के 190, श्रीलंका के 3425, सूडान के 1804, स्वीडन के 141, सीरिया के 124, तंजानिया के 3924, थाइलैंड के 574, तुर्की के 214, अमेरिका के 5501, युगांडा के 300, यूएई के 349, इंग्लैंड के 1797, उजबेकिस्तान के 250, यमन के 2008 और अन्य देशों के 2802 नागरिक शामिल हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे हैं।