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कैसे हुई सुरंग खोदकर बैंक में डकैती, 5 सवाल?

Wed, 29 Oct 2014 12:56 PM IST
अशोक शर्मा/अमर उजाला, गोहाना
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बैंक में सेंध लगाकर लॉकर से करोड़ों के जेवरात और नकदी चुराने के मामले में कुछ सवाल ऐसे हैं, जो हर किसी के जेहन में उठ रहे हैं। खासकर पुलिस इन्हीं सवालों को लेकर जांच में जुट गई है।
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इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिये पुलिस काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल सीधे तौर पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस भी धीमी आवाज में यह ही मान रही है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देना नामुमकिन है।

मोटी फर्मों के ही तोड़े लॉकर, क्यों?

बैंक के स्ट्रांग रूम में 360 लाकर है। इनमें से 181 से लेकर 270 तक सीरियल नंबर वाले लाकर को ही निशाना बनाया गया। क्यों? इस क्यों का जवाब और भी जरूरी लगेगा, जब ये पता चलेगा कि ये सभी लाकर शहर की मोटी फर्मों के थे।

शहर के अमीर लोगों में शुमार लोगों की ही पूंजी इन लाकरों में बंद थी। बैंक में और भी 271 लाकर थे, हालांकि वे इतने हाई क्लास लोगों के नहीं थे, लेकिन इसके बारे में चोरों को कैसे पता लगा?

40 लाख रुपये की नकदी छोड़ी, क्यों?

40 लाख रुपये कोई छोटी रकम नहीं होती। बैंक के स्ट्रांग रूम में शनिवार को ही बैंक अधिकारियों ने 40 लाख रुपये रखवाए थे। शनिवार तक सब ठीक था, सोमवार को देखा तो वारदात अंजाम दी जा चुकी थी, लेकिन 40 लाख रुपये वैसे के वैसे ही रखे थे। आखिर इतनी मेहनत के बाद वह 40 लाख रुपये क्यों नही ले गए।

सुरंग की एक्जेक्ट लोकेशन, कैसे?

चलो बंद पड़े मकान में सुरंग बनानी शुरू की। कोई भी शुरू कर सकता है, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन सुरंग का मुंह स्ट्रांग रूम में एग्जेक्ट लोकेशन पर कैसे पहुंचाया।

वो भी उस स्थिति में जब स्ट्रांग रूम में कई अलमारियां हैं, लेकिन सुरंग का मुंह एक अलमारी के पास खाली जगह में ही बनाया गया। सुरंग निकालने की इतनी एक्जेक्ट लोकेशन चोरों को कैसे पता लगी?

सुरंग वो भी इतनी सफाई से, कैसे?

चोरों ने किस कदर प्लानिंग कर वारदात को अंजाम दिया, ये सिर्फ सुरंग देखकर ही पता चल जाता है। सुरंग को इतनी सफाई से तैयार किया गया है कि किसी को कोई शक नहीं हुआ।

चोरों ने पहले नक्शा तैयार किया कि इस जगह पर पानी की पाइप है इस जगह पर बैंक की बिल्डिंग के सरिए हैं। स्ट्रांग रूम कहा हैं और कैसे ऊपर की ओर खुदाई करनी है।

सुरंग के रास्ते में बैंक की बिल्डिंग के पिलर भी आए, लेकिन उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया गया। इसी तरह सुरंग में पानी की पाइप लाइन, सीवर लाइन को भी नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
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चार छुट्टियां छोड़ रविवार क्यों?

ऐसा तो हो नहीं सकता कि चोर शनिवार रात को मकान में घुसे हों, सुरंग बनानी शुरू की और रविवार तक बैंक के स्ट्रांग रूम में निकल गए हों।

सवा सौ फुट से अधिक लंबी यह सुरंग बनाने में ही एक से डेढ़ माह का समय लग गया होगा। इसके बावजूद चोरों ने कुछ दिन पहले ही पड़ी दीपावली की चार छुट्टियों के बार रविवार का दिन ही चोरी के लिये क्यों चुना।
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