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पूर्व एसडीएम सहित अन्य के खिलाफ तय आरोप तय करने आदेश

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पूर्व एसडीएम सहित अन्य के खिलाफ तय आरोप तय करने आदेश
20 वर्ष पहले महिला फार्मासिस्ट के घर में जबरन घुसने और मेडिकल कराने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
20 साल पहले एक सीनियर महिला फार्मासिस्ट के घर में घुसकर जबरन पूछताछ और मेडिकल कराने के मामले में एडिशनल सेशन जज नीरजा कुलवंत कल्सन ने सीजेएम कोर्ट को आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में पूर्व आईएएस युद्धवीर सिंह ख्यालिया जो उस वक्त कालका के एसडीएम सहित तत्कालीन तहसीलदार कालका बृज सिंह, तत्कालीन डीएसपी राजश्री सिंह, एएसआई ओंकार, विजय दहिया, रमेश कुमार, जयदेव, मायारानी, राजेश सैनी, जय सिंह एवं स्वतंत्र गुप्ता के खिलाफ आरोप है।
यह मामला 20 वर्षों से अलग अलग अदालतों में विचाराधीन रहा है। इस मामले में तत्कालीन सरकारी अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा था कि सभी सरकारी ड्यूटी कर रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी भी महिला के घर में जबरन नहीं घुसा नहीं जा सकता। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सीजेएम पंचकूला की कोर्ट में इस केस को चलाने के लिए कहा था। लेकिन उस वक्त सीजेएम की कोर्ट ने युद्धवीर ख्यालिया सहित अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।
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इसके बाद पीड़ित फार्मासिस्ट ने एडिशनल सेशन जज नीरजा कुलवंत कल्सन की अदालत में अपील कर दी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को आधार बनाते हुए सीजेएम की अदालत में सभी के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश सुनाया है। साथ ही मामले को जल्द निपटाने के लिए भी आदेश दिया है।

सितंबर 1997 का है मामला
पीड़िता के आरोप के मुताबिक तत्कालीन कालका एसडीएम युद्धवीर सिंह ख्यालिया सहित अन्य अधिकारी फार्मासिस्ट के एचएमटी स्थित आवास में सितंबर 1997 में एक दिन जबरन घुस गए और वहां की वीडियोग्राफी भी कराई। माया रानी की ओर से दी गई शिकायत में महिला फार्मासिस्ट पर किसी व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने के आरोप भी लगाए गए थे। इसी आधार पर फार्मासिस्ट के घर पर युद्धवीर सिंह ख्यालिया ने पुलिस के साथ मिलकर रेड की थी। उस दौरान फार्मासिस्ट के साथ एक पुरुष भी था, जिसे टीम ने गिरफ्तार किए जाने की बात कही। लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकते, लेकिन दोनों का मेडिकल भी करवाया गया। मेडिकल में महिला-पुरुष के बीच शारीरिक संबंधों का खुलासा नहीं हुआ।
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राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट गई थी महिला
बाद में यह मामला अलग अलग अदालतों में भी पहुंचा। लेकिन महिला फार्मासिस्ट को राहत नहीं मिलने पर वह सुप्रीम कोर्ट में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने महिला फार्मासिस्ट के हक में फैसला सुनाते हुए निचली अदालत को आदेश दिए कि न तो एसडीएम को छापेमारी का अधिकार है और न ही उनकी ड्यूटी। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि मायारानी को भी शिकायत का अधिकार नहीं है।
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