चंडीगढ़। अपराध शाखा के पुलिसकर्मियों पर अमृतसर के एक व्यक्ति को एनडीपीएस एक्ट में फंसाने और छोड़ने के एवज में पांच लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एनएस शेखावत की बेंच ने यूटी प्रशासन, एसपी चंडीगढ़, अपराध शाखा के प्रभारी और मनीमाजरा थाना प्रभारी को नोटिस जारी किया है। वहीं, प्रशासन के वकील ने जवाब दायर करने के लिए समय की मांग की। अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी। उधर, चंडीगढ़ के एसएसपी को हलफनामे के रूप में जवाब दायर करने को कहा गया है।
अमृतसर के रहने वाले रणजीत सिंह उर्फ राणा (48) ने यूटी प्रशासन समेत, एसपी, अपराध शाखा के प्रभारी, अपराध शाखा के एसआई बलजीत सिंह, एसआई सुमेर सिंह और मनीमाजरा थाना प्रभारी को प्रतिवादी बनाया है। मौजूदा समय में याची बुड़ैल जेल में बंद है। मांग की गई है कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 29 के तहत बीते 15 अक्तूबर को मनीमाजरा थाने में दर्ज मामले की जांच सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए। यह भी मांग की है कि एक एसआईटी बनाई जाए जो कानून के तहत गहनता से मामले की जांच करे। याची को एनडीपीएस मामले में सह आरोपी बनाया गया है।
याची ने कहा है कि बीते 21 अक्तूबर को उनके घर पर अपराध शाखा इंचार्ज समेत एसआई बलजीत और एसआई सुमेर ने छापा मारा था। इस दौरान याची के बुजुर्ग पिता को धमकाया गया और याची को पेश करने को कहा गया। याची ने अगले दिन एसएसपी, अमृतसर को एक मांगपत्र दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 15 अक्तूबर के मामले में हरप्रीत सिंह नामक व्यक्ति से 53.60 ग्राम हेरोइन बरामद होने के मामले में पुलिस ने याची को गिरफ्तार किया था। याची 23 अक्तूबर को अपनी पत्नी और बेटे के साथ ससुराल में था जहां से 24 अक्तूबर की सुबह पुलिस ने पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिया था। यहां तक कि स्थानीय पुलिस को जानकारी नहीं दी।
हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की थी
याची की पत्नी को अपने पति की कोई जानकारी नहीं मिली तो उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की। इसकी सुनवाई 27 अक्तूबर को थी। हाईकोर्ट ने मामले में वारंट अधिकारी नियुक्त करने के आदेश देते हुए कहा था कि यदि पकड़े गए व्यक्ति को गैरकानूनी ढंग से कैद में रखा गया है तो उसे रिहा किया जाए। याचिका के मुताबिक उसी दिन याची को अमृतसर स्थित घर लाया गया और पुलिस ने उसे छोड़ने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे। याची की पत्नी उस दिन चंडीगढ़ हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई पर थी। फोन पर याची ने अपनी पत्नी को बताया कि उसे टार्चर किया गया और छोड़ने के नाम पर पांच लाख रुपये मांगे जा रहे हैं। मामले में कॉल रिकार्डिंग भी हाईकोर्ट में संलग्न की गई है।
रिश्वत की शिकायत करप्शन सेल को भी की
याची की पत्नी ने मामले में पुलिसकर्मियों की ओर से कथित रूप से रिश्वत मांगने को लेकर चंडीगढ़ पुलिस के करप्शन सेल को भी शिकायत दी। पुलिस के मुताबिक मामले में हरप्रीत सिंह ने पुलिस को कहा था कि वह गांव दोके के गुल्लू से नशा लाया था। याची को गिरफ्तार कर बताया गया कि उसके पाकिस्तान के नशा तस्करों के साथ लिंक हैं और ड्रोन के जरिए नशा मंगवाया जाता है। याची की पत्नी ने कहा कि 20 अक्तूबर को 106.36 ग्राम हेरोइन के अलावा पुलिस किसी मोबाइल फोन लिंक या ड्रोन की बरामदगी नहीं दिखा पाई।