भारत ने महिला वर्ल्ड कप फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर इतिहास रच दिया। इस जीत के पीछे चंडीगढ़ की बेटी अमनजोत कौर की भूमिका निर्णायक रही। मैच के आखिरी पलों में उन्होंने ऐसा शानदार कैच पकड़ा, जिसने मुकाबले की दिशा ही बदल दी और टीम इंडिया को चमचमाती वर्ल्ड कप ट्रॉफी दिलाई।
फाइनल से पहले अमनजोत ने अपनी दादी भगवंती कौर से फोन पर आशीर्वाद लिया था। और सच में, दादी का आशीर्वाद रंग लाया। जैसे ही भारत ने जीत दर्ज की अमनजोत के घर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार ने मिठाइयां बांटीं, मोहाली के फेज-5 में स्थित उनके घर के बाहर लोगों का हुजूम लग गया।
पिता भूपिंदर सिंह ने कहा कि भारत की बेटियों ने आज इतिहास रच दिया है। कपिल देव की तरह अब हमारी बेटी अमनजोत ने भी शहर का नाम रोशन किया है। मां रंजीत कौर ने गर्व से कहा कि आज बेटी ने देश का नाम ऊंचा किया है। उसकी मेहनत और आत्मविश्वास ने यह मुकाम दिलाया है।
तीन मैच हारकर टीम ने की वापसी
भारतीय महिला क्रिकेटर अमनजोत कौर के शानदार प्रदर्शन पर उनके कोच नागेश गुप्ता ने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है, जिससे पूरे देश में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई है। टीम ने शुरुआती दो मैच जीते, फिर तीन मुकाबले गंवाए, लेकिन उसके बाद शानदार वापसी करते हुए सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया और फाइनल में विजयी रही। अमनजोत कौर का निर्णायक कैच मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने कहा यह जीत ऐतिहासिक है क्योंकि इसने महिला वर्ल्ड कप में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के 25 साल पुराने दबदबे को तोड़ दिया है।
फिटनेस, समर्पण और फील्डिंग पर कभी भी शक नहीं- नागेश
अमनजोत के कोच नागेश गुप्ता ने कहा कि मेरा सपना पूरा हुआ है। मुझे भरोसा था कि अमनजोत एक दिन देश के लिए बड़ा काम करेगी। उसकी फिटनेस, समर्पण और फील्डिंग पर कभी भी शक नहीं था। भारत ने महिला वर्ल्ड कप में जीत का पूरा देश जश्न मना रहा है। इससे चंडीगढ़ की महिला खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। सभी की जुबान पर एक ही बात है... जीत तो खेल का हिस्सा है, फाइनल तक पहुंचना गर्व की जीत से कम नहीं है।
पिता की मेहनत ने दी ऊंची उड़ान
मोहाली के फेज-5 में रहने वाले भूपिंदर सिंह लकड़ी का काम करते हैं। बेटी को क्रिकेटर बनाने के लिए उन्होंने हर दिन संघर्ष किया। वे रोज साइकिल पर अमनजोत को सेक्टर-26 क्रिकेट ग्राउंड तक छोड़ने जाते थे। कई बार ट्रेनिंग के लिए उन्होंने अपनी दिनभर की दिहाड़ी तक छोड़ दी। आज वही मेहनत रंग लाई। बेटी ने देश को वर्ल्ड कप जिताकर पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।