सीपीआई द्वारा बठिंडा सीट से कांग्रेस-पीपीपी के साझा उम्मीदवार मनप्रीत बादल को समर्थन देने की घोषणा के बाद इस सीट पर चुनावी जंग दिलचस्प हो गई है।
इस सीट पर मनप्रीत का मुकाबला शिअद की हरसिमरत कौर बादल से है। लिहाजा हरसिमरत कौर की जीत बादल परिवार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है वहीं पीपीपी, कांग्रेस और सीपीआई के इकलौते प्रत्याशी बन गए मनप्रीत सिंह बादल को दो दलों और उनके वोट बैंक का साथ मिल गया है।
मनप्रीत बादल ने पहले दावा किया था कि सीपीआई का कांग्रेस से समझौता हो जाएगा और उसके बाद सीपीआई बठिंडा में उनका साथ देगी। लेकिन कांग्रेस और सीपीआई का समझौता सिरे नहीं चढ़ सका।
इसके बाद कई दिन तक सीपीआई के रुख को लेकर असमंजस बना रहा। अब सीपीआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. जोगिंदर दयाल ने साफ कर दिया है कि बठिंडा सीट पर पार्टी बिना शर्त मनप्रीत बादल को समर्थन देगी। सीपीआई के फैसले से मनप्रीत को काफी राहत मिली है, क्योंकि इस प्रतिष्ठित सीट पर भाकपा कैडर का वोट बैंक मददगार साबित हो सकता है।
2009 के लोक सभा चुनाव में सीपीआई को बठिंडा सीट से बीस हजार से ज्यादा वोट मिले थे। वहीं, 2012 केविधानसभा चुनाव के दौरान संसदीय हलके की दो सीटों बठिंडा देहाती व मानसा से पार्टी को 48 हजार से ज्यादा वोट प्राप्त हुए थे। सीपीआई नेताओं के ऐलान के बाद मनप्रीत को इसी परंपरागत वोट बैंक का फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।