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प्लास्टिक का उपयोग करने वाली कंपनियों को सीपीसीसी की चेतावनी

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चंडीगढ़। एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल पर चंडीगढ़ प्रशासन एक बार फिर सख्त नजर आ रहा है। शुक्रवार को प्रशासन के चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (सीपीसीसी) की ओर से प्लास्टिक के उत्पादों का उत्पादन करने वाली सभी कंपनियों को एक नोटिस जारी किया गया। नोटिस में ऐसी सभी कंपनियों को हिदायत दी गई कि वह 30 दिनों के अंदर खुद को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 के तहत पंजीकृत कराएं, अन्यथा उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य सचिव की ओर से जारी यह नोटिस प्लास्टिक का उत्पादन करने वाले सभी कंपनियां, उत्पादों के मालिक, रिसाइकल करने वाली कंपनियां, प्लास्टिक के कैरी बैग बनाने समेत अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए है। इसमें स्पष्ट किया गया कि चंडीगढ़ में प्रशासन ने एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में इनका इस्तेमाल करना एनवायरनमेंट प्रोटक्शन एक्ट-1986 की अवहेलना है और ऐसी स्थिति में कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में कहा गया है कि ऐसी सभी कंपनियां प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के तहत खुद को सीपीसीसी के पास पंजीकृत कराएं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए सभी कंपनियों को 30 दिन का समय दिया है। नोटिस में कहा गया है कि अगर 30 दिन के भीतर प्लास्टिक के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां सीपीसीसी के पास खुद को पंजीकृत नहीं करवाते हैं, तो उन पर नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने जुलाई में तीन प्लास्टिक के उत्पाद प्रतिबंधित सूची से किए थे बाहर
यूटी प्रशासन ने दो जुलाई को आदेश जारी कर प्लास्टिक उत्पादों में से 500 एमएल की क्षमता से कम वाले प्लास्टिक रिफिल पाउच, टेट्रा पैक के साथ मिलने वाले स्ट्रॉ और खाने की पैकिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले मल्टीलेयर्ड पैकेजिंग को सूची से बाहर कर दिया था। प्रशासन ने प्लास्टिक के विभिन्न उत्पादों का उत्पादन करने वाली कंपनियों को 28 मार्च 2020 तक का समय दिया था, ताकि वह इन प्लास्टिक उत्पादों की जगह इनके अन्य विकल्पों की तलाश कर सकें। मार्च महीने में केंद्र सरकार की तरफ से लॉकडाउन लगा दिया गया, जिसकी वजह से इन प्लास्टिक उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनियां इनके विकल्प को नहीं तलाश पाईं। कंपनियों की तरफ से तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की गई थी, जिसके प्रशासन ने मान लिया था। कंपनियों को इस शर्त पर इजाजत दी गई थी कि वह ही इनके निपटान की जिम्मेदारी उठाएंगी।
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पांच साल की सजा या एक लाख जुर्माने का प्रावधान
यूटी प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना के तहत शहर में किसी भी तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी है। अधिसूचना में स्पष्ट है कि प्लास्टिक, थर्माकोल, स्टायरोफोम वस्तुओं का दुकानदार, विक्रेता, होल सेलर विक्रेता, व्यापारी, फेरीवाला या रेहड़ीवाला, कोई भी व्यक्ति निर्माण, भंडारण, आयात, बिक्री, आपूर्ति या उपयोग नहीं कर सकता है। अगर कोई दुकानदार, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनियां सिंगल यूज प्लास्टिक के सामान का इस्तेमाल करती हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसमें सजा के साथ भारी जुर्माना भी देना होगा। अधिसूचना में स्पष्ट था कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम- 1986 की धारा 15 के तहत, जो कोई भी इन आदेशों का पालन करने में विफल रहता है, उन्हें पांच साल की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना देना होगा। खास मामलों में दोनों एक साथ भी लगाए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद से अब तक करीब 400 लोगों के चालान काटे गए हैं। यह चालान कोरोना से पहले काटे गए थे।
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