खुले शेड, बेहिसाब गंदगी और सूखा चारा... नगर निगम की तरफ से संचालित गोशालाओं की बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने नगर निगम द्वारा संचालित गोशालाओं का निरीक्षण किया, तो हालात बेहद चिंताजनक पाए गए।
हैरानी की बात यह है कि गोशालाओं पर करीब 6 से 7 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है, बावजूद इसके व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। एक पशु पर करीब 165 रुपये का खर्च आता है। इसके लिए पूरे साल का टेंडर एक साथ हो जाता है।
मलोया स्थित गोशाला में इस समय करीब 480 गाय मौजूद हैं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गायों को खाने में केवल सूखा भूसा दिया जा रहा था जबकि हरा चारा पूरी तरह नदारद था। इसके अलावा कई स्थानों पर कुर्लियां (पशुओं का खाना रखने के बर्तन) टूटी हुई मिलीं। जैसे ही टीम पशुओं के पास पहुंची, वे तुरंत भोजन की उम्मीद में पास आ गईं।
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 की गोशाला में बड़ी संख्या में गाय और भैंस रखी गई हैं। यहां हाल ही में कर्मचारियों की ड्यूटी बदली गई है, जिसके चलते कर्मचारियों को यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि कितने जानवरों को भोजन दिया जा रहा है। यहां भी पशुओं को सिर्फ सूखा भूसा ही दिया जा रहा था। शेड में ठंडी हवा रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। निरीक्षण के दौरान कुछ गायों के शरीर पर घाव के निशान भी पाए गए। मौके पर पहुंचीं डिप्टी मेयर तरुणा मेहता ने आरोप लगाया कि हरा चारा पर्याप्त मात्रा में नहीं दिया जा रहा और अधिकारी केवल दिखावटी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गायों को देखकर ऐसा लगता है, मानो उन्हें पहली बार भोजन मिला हो।
इंडस्ट्रियल एरिया में एमआरएफ सेंटर के पास स्थित गोशाला की स्थिति भी बेहद चिंताजनक पाई गई। 10 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में बड़ी संख्या में पशु खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थे। ठंडी हवा रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। यहां टीन शेड तो लगाए गए थे लेकिन उनसे भी हवा आसानी से अंदर आ रही थी। कुछ शेडों की ऊंचाई मानकों से कम थी, जिससे सर्दियों में ठंड और गर्मियों में अत्यधिक गर्मी लगना स्वाभाविक है। इस गोशाला में 700 से अधिक जानवर मौजूद थे, जिनमें गायों के बछड़ों की हालत सबसे ज्यादा खराब पाई गई।
सेक्टर-25 और सेक्टर-45 में स्थित गोशालाओं की व्यवस्था अन्य स्थानों की तुलना में बेहतर पाई गई। सेक्टर-45 में गौरी शंकर सेवा दल द्वारा गोशाला का संचालन किया जा रहा है। यहां गायों के लिए इस तरह के शेल्टर बनाए गए हैं कि धूप निकलने पर चादर हटा दी जाती है और ठंड बढ़ने पर चारों तरफ से शेड को ढक दिया जाता है। हालांकि, एक शेड में सफाई पूरी तरह संतोषजनक नहीं थी, लेकिन शेड की ऊंचाई मानकों के अनुरूप पाई गई।
-शेड की ऊंचाई ऐसी हो कि सर्दी कम लगे और गर्मी में राहत मिले
-ठंडी हवा और लू से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम किए जाएं
-सूखे भूसे के साथ पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराया जाए
-नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए क्योंकि गोबर और मूत्र से गंदगी फैलती है और पशु बैठ नहीं पाते
सभी तरह की कमियों को दूर करने का आदेश दिया है। इसमें खाने के पर्याप्त इंतजाम से लेकर ठंड से बचाव और बाकी सभी तरह की समस्याओं को दूर करने का निर्देश दिया गया है। -अमित कुमार, नगर नगर आयुक्त