केस- 2 : सेक्टर-15 निवासी विवेक शर्मा (बदला नाम) सात दिन पहले कोरोना संक्रमित मिले थे। यह बात उन्होंने पड़ोसियों तक को नहीं बताई। वह पहले की तरह नियमित बाजार जाते रहे। एक दिन रास्ते में जीएमएसएच-16 के एक जान-पहचान के कर्मचारी की नजर उन पर पड़ गई, उसने विवेक शर्मा को खुलेआम बाहर घूमने से मना किया।
जाने-अनजाने आ रहे संक्रमण की चपेट में
संक्रमित मरीजों की लापरवाही से जाने-अनजाने में लोग कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। पार्क में सैर के दौरान संक्रमित बेंच, रेलिंग, झूला, गेट जिन-जिन चीजों को छू रहे हैं, उसे ही सामान्य लोग जाकर छूकर वायरस की जद में आ रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद रैपिड रिस्पांस टीम घर जाकर एकांतवास में रहने की सलाह देने के साथ वेलनेस किट और सेल्फ मॉनीटरिंग चार्ट देती है। जोनल इंचार्ज की जिम्मेदारी है कि लगातार फॉलोअप करता रहे। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर टीम अस्पताल ले जाती है, अन्यथा एकांतवास में ही रहने की सलाह देती है। कोई भी परेशानी होने पर तत्काल हेल्प डेस्क पर कॉल कर सूचना देने का निर्देश दिया जाता है, ताकि स्थिति गंभीर होने पर टीम राहत कार्य कर सके। - डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक, चंडीगढ़ ।
स्वास्थ्य विभाग संक्रमित व्यक्ति या संस्थान की सूचना देता है। इसमें व्यक्ति अथवा संस्थान की पूरी जानकारी होती है। टीम स्थल का दौरा कर जगह के हिसाब से क्वारंटीन करती है। घर में अलग कमरे व शौचालय की व्यवस्था होनी जरूरी है। जगह के अभाव में क्वारंटीन करने के लिए प्रशासन की ओर से बनाए केंद्रों पर भेजा जाता है। कोई संक्रमित व्यक्ति बाहर घूम रहा है तो उसकी जानकारी स्थानीय पुलिस और एरिया मजिस्ट्रेट को दी जा सकती है। कार्रवाई की शक्ति उनके पास होती है। - अनिल गर्ग, नोडल अधिकारी, नगर निगम क्वारंटीन टीम।