चंडीगढ़ में कई संपत्तियों पर अदालत ने स्टे लगा रखा है। इस वजह से ये संपत्तियां वर्षों से खाली पड़ी हैं। विभाग ने भी स्टे को हटवाने में खास रुचि नहीं दिखाई। इस कारण कई परियोजनाएं अटकी पड़ी हैं। अब प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने एस्टेट ऑफिस से उन सभी संपत्तियों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है जिन पर स्टे लगी हुई है। साथ ही विभाग ने अब तक क्या फॉलोअप किया है, ये भी पूछा है। फर्नीचर मार्केट में अतिक्रमण का मुद्दा सामने आने पर सलाहकार ने असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर-2 सौरभ अरोड़ा को यह आदेश दिया।
धर्मपाल को बताया गया कि फर्नीचर मार्केट में पीछे की तरफ अतिक्रमण बढ़ रहा है। कुछ दुकानों को वर्ष 1994 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है। इस पर उन्होंने पूछा कि वर्ष 1994 से अगर स्टे है तो विभाग ने अब तक क्या किया। अगर कोई फालोअप नहीं किया गया तो यह किसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि फिर डिजिटलीकरण का क्या फायदा। इसके बाद उन्होंने इस केस की स्टेटस रिपोर्ट मांग ली। साथ ही कहा कि एस्टेट ऑफिस एक रिपोर्ट देकर बताए कि किन-किन संपत्तियों पर स्टे है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। सलाहकार को बताया गया कि फर्नीचर मार्केट की जो संपत्तियां बिना स्टे की हैं, उन्हें चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को दे दिया गया है। साथ ही स्टे को हटाने के लिए भी हाईकोर्ट में अप्लीकेशन दी जाएगी।
स्टे का बहाना बना 350 करोड़ की संपत्ति पर कर लिया था कब्जा
मनीमाजरा के अंडरब्रिज के पास साढ़े 350 करोड़ की संपत्ति पर एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट स्टे का बहाना बनाकर कई वर्षों तक कब्जा जमाए रखा। कुछ महीने पहले धर्मपाल मनीमाजरा के दौरे पर गए तो मेयर सरबजीत कौर उन्हें उस जमीन पर लेकर गईं। वहां अंदर किराए पर प्लॉट उठाए गए थे। किसी में टाइल फैक्ट्री तो कहीं मूंगफली आदि बेची जा रही थी। सलाहकार ने अफसरों से पूछा तो उन्हें बताया गया कि इस संपत्ति पर हाईकोर्ट का स्टे है। धर्मपाल ने पूछा कि स्टे क्यों है तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था। सलाहकार ने खुद वहां मौजूद लोगों से बातचीत की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह स्टे के कागज मांगे। बाद में पता चला कि वहां हाईकोर्ट का कोई स्टे नहीं था। वह व्यक्ति स्टे का बहाना बनाकर कई वर्षों से कब्जा जमाए बैठा था। अब प्रशासन ने जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है।