पहली पत्नी के बावजूद दूसरी शादी करने वाले भारतीय सेना से कोर्ट मार्शल हुए व्यक्ति को जिला अदालत ने दो साल की सजा सुनाई है। सजा पाने वाला किशनगढ़ वसंत विहार, नई दिल्ली निवासी अमरजीत सिंह है। अदालत ने उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। दोषी की अनुशासनहीनता पर भारतीय सेना ने 1979 में उसका कोर्ट मार्शल कर उसे सेना से निकाल दिया था।
इसके कुछ साल बाद वह लापता हो गया था। उस वक्त दोषी सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात था। वहीं, खास बात यह रही कि दोषी के खिलाफ उसकी मां ने भी अदालत में बयान दिए थे। सेक्टर-33सी निवासी महिला ने जिला अदालत में आईपीसी की धारा 394 के तहत केस दायर किया था।
इसमें उनका कहना था कि उनकी शादी 16 जनवरी 1977 में अमरजीत सिंह से सिख रीति-रिवाज से हुई थी। उस समय वह भारतीय सेना में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे। शादी के बाद 4 नवंबर 1977 को उनका बेटा हुआ था। 23 जनवरी 1979 को भारतीय सेना ने अनुशासनहीनता के आरोप में अमरजीत सिंह का कोर्ट मार्शल कर दिया।
इसके बाद से वह दिल्ली की जगह चंडीगढ़ सेक्टर-33सी स्थित घर पर आकर रहने लगा। कोर्ट मार्शल होने के बाद भी वह नहीं सुधरा और अवैध काम करने लगा। इसी दौरान उसने एक महिला से अवैध संबंध भी बनाए। इस पर विवाद होने के बाद वह चंडीगढ़ छोड़कर दिल्ली जाकर रहने लगा। वहां 1980 में उन्हें एक बेटी हुई। बेटे को नौकरी से निकाले जाने के बाद उनके पिता जो कि खुद सेना से विंग कमांडर के पद से रिटायर हुए थे, उन्होंने लोन लेकर बेटे के लिए बिजनेस शुरू किया।
15 मई 1984 में अमरजीत काम के सिलसिले में उत्तर प्रदेश गया और उसके बाद कभी लौटकर नहीं आया। परिजनों ने उसे सब जगह तलाशा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। 1984 में दिल्ली में दंगे हुए थे तो परिजनों ने सोचा वह उसी का शिकार बन गया होगा।
दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में रह रहा था दूसरी पत्नी के साथ
शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 जुलाई 2010 को उन्हें उनके ससुर का फोन आया कि उनका पति जिंदा है और उसका दिल्ली से एक लेटर आया है। इसमें उसने प्रापर्टी में आधा हिस्सा मांगा है। उस वक्त शिकायतकर्ता आस्ट्रेलिया में शादीशुदा बेटी के साथ रह रही थीं जबकि उनका बेटा कनाडा में रहता था। उन्होंने दोनों बच्चों को इस बारे में बताया। पति के जिंदा होने की सूचना से काफी खुश हुईं और इंडिया आने की तैयारी करने लगीं लेकिन, कुछ दिन बाद उनके ससुर का फिर से फोन आया कि अमरजीत पिछले 15-20 साल से दिल्ली में वसंत कुंज में रह रहा है और उसने दूसरी शादी कर ली है।
दूसरी बीवी से उसके बच्चे भी हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार 21 अक्तूबर 2010 को वह भारत आईं तो उन्हें पता चला कि उनके पति ने अपने पिता के खिलाफ प्रापर्टी में हिस्से के अदालत में केस दायर कर दिया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह इतने साल से सास-ससुर की दया और निराशा में अर्द्ध विधवा का जीवन जी रही थीं जबकि पति इतने साल से दूरी महिला के साथ आराम से जिंदगी जी रहा था।