अगल-अलग तरह से जनहित याचिकाओं के माध्यम से कोर्ट का समय बर्बाद करने वालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फालतू के मामले लाकर कोर्ट का समय बर्बाद न करें। कोर्ट ने कहा कि कल को सड़क पर थूकने वालों के खिलाफ याचिका आएगी तो क्या हम उस पर सुनवाई कर रोक लगाने का काम करेंगे।
एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि ग्राहकों को जल्द से जल्द खाना पहुंचाने के चक्कर में डिलीवरी ब्वॉय तेजी से वाहन चलाते हैं, जो दुर्घटना का कारण बनता है। बीते कुछ दिनों में ही चार ऐसे हादसे हुए हैं और ऐसे में इस दिशा में आवश्यक आदेश जारी किए जाएं।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि तेजी से वाहन चलाने का मामला मोटर व्हीकल एक्ट के अधीन आता है, ऐसे में कोर्ट को आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है। वहीं, कोर्ट से अपील की गई थी कि यदि इनके साथ कोई हादसा होता है तो मालिकों को उनकेपरिवार वालों को उचित मुआवजा जारी करने के आदेश जारी करें।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मालिक और कर्मचारी के बीच का मामला है और इसको लेकर कई विकल्प मौजूद हैं। कई कानूनी तरीकों से मुआवजे की मांग की जा सकती है। इस प्रकार के मामलों को जनहित याचिका के तौर पर सुनना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।