चंडीगढ़। जिला अदालत ने आठ साल पुराने मामले में फतेहाबाद के बुहाना सब-तहसील के नायब तहसीलदार के हक में फैसला सुनाया है। नायब तहसीलदार जमीत राय (62) ने अपने हक के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। जमीत की ओर से केस लड़ रहे एडवोकेट अभिनव गोयल ने बताया कि वर्ष 2014 में उनके कार्यालय में एक फर्जी विजिलेंस रेड हुई थी। इस मामले में जमीत पर झूठी एफआईआर दर्ज की गई। इस केस का करीब दो साल तक ट्रायल चला और बाद में अदालत ने उन्हें इस केस से बरी कर दिया था लेकिन उसके बावजूद हरियाणा सरकार ने उनको सेवानिृवत्ति लाभ नहीं दिया। इसे लेकर उन्होंने जिला अदालत में केस दर्ज किया था।
सिविल डिवीजन (जूनियर डिविजन) जज चेतेश गुप्ता की अदालत ने सेक्टर-एक स्थित हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्तीय आयुक्त के साथ राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग को यह आदेश दिया है कि जमीत सिंह को सेवानिृवत्ति लाभ 18 फीसदी ब्याज के साथ दिया जाए।
2016 में विभाग को लिखा था पत्र
एडवोकेट अभिनव गोयल ने बताया कि जमीत को जब फतेहाबाद की अदालत ने बरी किया था तो उन्होंने 20 मार्च 2016 को हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त आयुक्त के साथ राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने विभाग से अपने सेवानिवृत्ति लाभों को जारी करने के लिए अनुरोध किया। जो उनके निलंबन के दौरान संबंधित विभाग ने रोके रखा था। जमीत ने फिर से विभाग को 26 जुलाई 2016 को एक पत्र लिखा और अपने सेवा लाभ जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
वर्ष 2019 में बिना ब्याज जारी की राशि
आखिरकार हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वित्त आयुक्त के साथ ही राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने 5 जुलाई 2019 को उन्हें बकाया राशि जारी कर दी गई लेकिन इस भुगतान पर कोई ब्याज नहीं दिया। 26 नवंबर 2018 के कार्यालय आदेश के अनुसार जमीत को निलंबन अवधि के दौरान ड्यूटी पर माना जाना था और वह अपनी सेवानिवृत्ति से सभी प्रकार के सेवानिवृत्ति लाभों के हकदार थे, लेकिन विभाग ने उन्हें ब्याज सहित राशि नहीं दी।