अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) से कहा है कि वह खुद तय करे कि पूर्व डीजीपी पीवी राठी और इनेलो के एमएलए शेर सिंह बड़सामी में से असली हरियाणा ओलंपिक एसोसिएशन (एचओए) कौन सी है?
बता दें कि पीवी राठी फिलहाल मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल एडवाइजर (सीआईडी एंड होम) हैं। वहीं शेर चिंह बड़सामी को पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला व अजय सिंह चौटाला के साथ टीचर भर्ती घोटाले में दस साल की सजा मिली है। दोनों ही ग्रुप के बीच काफी समय से एचओए की कमान को लेकर खींचतान चली आ रही है।
वर्ष 2004 में इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला एचओए के अध्यक्ष थे और वह हमेशा के लिए इस पद पर बने रहना चाहते थे। इस संबंध में जून 2004 में एसोसिएशन की एक बैठक हुई। इसमें एसोसिएशन का संविधान बदलते हुए ताउम्र प्रधान बने रहने का प्रस्ताव पास किया गया था।
हालांकि 2006 में इसे भंग कर दिया गया। चौटाला जब एचओए के अध्यक्ष थे तो हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस इस पद पर अपने प्रतिनिधि को तैनात करना चाहती थी। लिहाजा नवीन जिंदल को छह मई 2006 को एचओए का अध्यक्ष बनाया गया और यहां से इनेलो और कांग्रेस के बीच कोर्ट केस शुरू हुआ।
इस बीच 2008 में फिर से एचओए के चुनाव हुए और पूर्व डीजीपी पीवी राठी को अध्यक्ष चुना गया, लेकिन इसे मान्यता नहीं मिल सकी। क्योंकि उस वक्त अभय सिंह चौटाला आईओए के अध्यक्ष थे। एक बार फिर से 2012 में दो बार चुनाव हुए। एक बार राठी अध्यक्ष चुने गए, वहीं इनेलो ग्रुप ने दूसरा चुनाव कराया तो शेर सिंह बड़सामी अध्यक्ष चुने गए। तब से मामला कोर्ट में ही विचाराधीन था।
इस पर अब कोर्ट ने कहा है कि आईओए ही दोनों ग्रुप में से असली ग्रुप कौन सा है इसे आईओ तय करे। तीन महीने में यह तय किया जाए और तब तक दोनों ग्रुप में से कोई भी खुद को एसोसिएशन का पदाधिकारी न बताए।