परिजनों ने इस मामले में दंपती समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दंपती और उसके बेटे को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
इकलौते बेटे के लिए छह साल लड़ी न्याय की लड़ाई
अदालत के फैसले के बाद प्रमोद के पिता गुणपाल ने कहा कि बेटे को न्याय दिलाने के लिए उन्होंने छह साल तक लंबी लड़ाई लड़ी। प्रमोद उनका इकलौता बेटा था। उन्होंने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया था। बीए तक पढ़ाई करवाई और वह आगे लॉ की पढ़ाई कर रहा था। परिवार की सभी उम्मीदें उसी से जुड़ी थीं। बेटे की हत्या के बाद परिवार ने न्याय के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ी।
2014 में तोशाम से भाजपा के टिकट पर लड़ा था चुनाव
गुणपाल ने वर्ष 2014 में भाजपा की टिकट पर तोशाम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला किरण चौधरी से हुआ था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। गुणपाल सांसद धर्मबीर सिंह के करीबी रहे हैं।
घर लौटते वक्त किया था हमला
17 मई 2019 की रात करीब 11-12 बजे प्रमोद घर लौट रहा था। गांव में राजेश के घर के पास पहुंचने पर चाचा महेश कुमार ने देखा कि राजेश समेत शमशेर, नवीन, सुनीता, सुरेश, धर्मबीर, कृष्ण, प्रदीप, पवन और नरेश उसे घेरकर लाठी-डंडों से पीट रहे थे। महेश ने बचाने की कोशिश की तो राजेश ने रिवाल्वर उसकी कनपटी पर लगा दी और बीच में आने पर गोली मारने की धमकी दी। इसके बाद आरोपियों ने प्रमोद को पीटते हुए शमशेर के घर में ले जाकर बंद कर दिया।
महेश के अनुसार, वह प्रमोद को बचाने पहुंचा तो आरोपियों ने उसे भी धमकाकर घर से बाहर कर दिया। उसने तुरंत अपने भाई गुणपाल को घटना की जानकारी दी। दोनों मौके पर पहुंचे और किसी तरह बंद कमरे से खून से लथपथ प्रमोद को बाहर निकाला। उसे सिविल अस्पताल भिवानी से पीजीआई रोहतक और फिर 18 मई को एम्स ट्रॉमा सेंटर दिल्ली ले जाया गया। आईसीयू में 11 दिन इलाज के बाद 28 मई 2019 को प्रमोद ने दम तोड़ दिया।