चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में सोमवार को देश के पहले साक्ष्य-आधारित मिलेट्स क्लीनिक की शुरुआत हुई। सरकारी अस्पताल में अपने तरह के खास क्लीनिक का उद्घाटन प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने किया। उन्होंने अस्पताल में कोबाल्ट थेरेपी यूनिट और आयुष्मान भारत कियोस्क का भी शुभारंभ किया। इस दौरान जब उन्हें मिलेट्स से तैयार व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए कहा गया, तो उन्होंने बताया कि वह उचित आहार के साथ अपने शरीर का वजन बनाए रख रहे हैं। उनका वजन पिछले 39 वर्षों से स्थिर बना हुआ है।इस क्लीनिक में चिकित्सक रोगी की आवश्यकता के अनुसार मिलेट्स के आहार लिखेंगे। इसके साथ ही मरीज पर उस आहार से होने वाले लाभों को देखने के लिए डाटा भी एकत्र करेंगे। पूर्व में हुए शोध प्रकाशन की मदद लेकर मरीज की आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट मिलेट्स निर्धारित किया जाएगा। यह क्लीनिक ओपीडी और अस्पताल में भर्ती मरीजों दोनों के लिए होगा।
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मर्ज के अनुसार तय होगा मिलेट्स का आहार
जीएमसीएच की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. मधु अरोड़ा ने बताया कि मिलेट्स की कई किस्में हैं। उनमें कुछ में उच्च फाइबर, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और कम कोलेस्ट्रॉल होता है। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि इन्हें कैसे तैयार किया जाए और अपने शरीर की आवश्यकता और बीमारी के अनुसार कितना खाना चाहिए। क्योंकि मिलेट्स के अधिक सेवन से पेट की समस्याएं हो सकती हैं। इस कारण अधिकांश लोग यह मानते हैं कि यह चमत्कारिक आहार के रूप में काम नहीं कर सकता है, इसलिए मानक का पालन होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि क्लीनिक रविवार और छुट्टियों को छोड़कर पूरे सप्ताह सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच चलेगा। क्लीनिक में मरीजों को देखने वाले डॉक्टर बायोकमेस्ट्री विभाग और आहार विज्ञान विभाग से होंगे।
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फॉलोअप में होगा परिणाम का विश्लेषण
बायोकेमेस्ट्री विभाग की डॉ. शिवानी जसवाल ने बताया कि मरीजों का सारा डाटा रिकॉर्ड कर उसका विश्लेषण किया जाएगा ताकि देखा जा सके कि मिलेट्स आहार का कितना पालन हो रहा है। इसका परिणाम क्या रहा है। इसके लिए हम मरीजों को फॉलो-अप के लिए बुलाएंगे और अनुपालन न होने की स्थिति में उसके कारण जानने का प्रयास होगा। मिलेट्स का नुस्खा साक्ष्य आधारित विज्ञान पर आधारित होगा। उदाहरण के लिए, थायरॉयड रोग या सूजन आंत्र रोग वाले लोगों को किसी विशेषज्ञ की देखरेख के बिना मिलेट्स नहीं लेना चाहिए। वहीं, मिलेट्स क्लीनिक की फाउंडेशन समिति की डॉ. कृति शुक्ला ने बताया कि मिलेट्स चिकित्सीय रूप से डिजाइन किया जाएगा और रोकथाम और उपचार दोनों के लिए काम करेगा। यह एक सहायक के रूप में काम करेगा, जो एक स्टैंडअलोन के बजाय उपचार को बढ़ाता है। हम मरीजों की अपेक्षाओं के अनुसार बाजरा आहार डिजाइन करेंगे।
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कोबाल्ट थेरेपी यूनिट
कैंसर रोगियों को विकिरण चिकित्सा प्रदान करने के लिए जीएमसीएच में एक नई कोबाल्ट थेरेपी यूनिट स्थापित की गई है। यह कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने और नष्ट करने के लिए रेडियोधर्मी आइसोटोप, कोबाल्ट-60 से उत्सर्जित गामा किरणों का उपयोग करता है। यह विशेष रूप से उन्नत विकिरण चिकित्सा के लिए सीमित संसाधनों या बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रों में कैंसर के उपचार में बेहद प्रभावी है।
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आयुष्मान भारत कियोस्क
जीएमसीएच में एक नया आयुष्मान भारत कियोस्क स्थापित किया गया है। यह सूचना केंद्र के रूप में काम करेगा, जो नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रदान करेगा। इसके माध्यम से मरीज स्वास्थ्य बीमा, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।