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Punjab: पंजाब में कपास की खेती को नहीं मिल रहा बढ़ावा, 96 हजार एकड़ में सिमटी, कई हैं कारण

Fri, 14 Jun 2024 04:59 PM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब के आठ जिले जोकि कपास की खेती के लिए पहचाने जाते हैं, वहां इस बार कपास की खेती का रकबा 96 हजार एकड़ भूमि में सिमट कर रह गया है। 1990 के दशक में पंजाब में कपास के तहत 7 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन पिछले कई वर्षों में यह धीरे-धीरे सिकुड़ गया।
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कपास का उत्पादन - फोटो : Social Media
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विस्तार
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पंजाब में कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम कदम उठाए। इसके बावजूद कपास की खेती 96 हजार एकड़ में सिमट कर रह गई है। कपास की खेती छोड़ किसान दूसरी खेती जैसे धान आदि के पैदावार की ओर रुख कर रहे हैं।

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कृषि विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते वर्ष प्रदेश में एक लाख 79 हजार एकड़ में कपास की खेती हुई थी, जबकि वर्ष 2022 में दो लाख 48 हजार एकड़ में थी। कपास की खेती में लगातार गिरावट के पीछे कारण किसानों के समय पर अच्छे बीज और कीटनाशक उपलब्ध न होना और गुलाबी सुंडी की मार रहे हैं। यहां तक कि बीते सितंबर में बारिश के कारण खराब हुई खेती का सरकार की ओर से उचित मुआवजा न मिलने के कारण भी किसानों का कपास की खेती से मोह भंग हो रहा है।

आठ जिले जहां कपास की खेती इस बार गिरी

प्रदेश के आठ जिले जोकि कपास की खेती के लिए पहचाने जाते हैं, वहां इस बार कपास की खेती का रकबा 96 हजार एकड़ भूमि में सिमट कर रह गया है। इन आठ जिलों में कपास की खेती के मौजूदा रकबा की अगर बात करें तो फाजिल्का में 50,301 एकड़, बठिंडा में 12,496 एकड़, मानसा में 22,516 एकड़, मुक्तसर साहिब में 10,019 एकड़, संगरूर में 224 एकड़, बरनाला में 440, फरीदकोट में 232 और मोगा में 72.5 एकड़ जमीन में कपास की खेती का दर्ज किया गया है।

83 हजार एकड़ रकबा घटा, धान की खेती में जुटे

इस बार करीब 83 हजार एकड़ कपास की खेती का रकबा कम हुआ है। मोहाली के रहने वाले कृषि विशेषज्ञ मनमोहन सिंह ने बताया कि नरमे यानी कपास की खेती के रकबे में दर्ज की गिरावट के पीछे कई कारण हैं। जो 83 हजार रकबा घटा है, उसमें किसान इस बार धान और अन्य खेती की ओर बढ़े हैं। यह भविष्य के लिए एक संकट भी खड़ा करता है, अगर कपास की खेती की ओर राज्य सरकार ध्यान नहीं देती है। जैसे फसल खराब होने पर मुआवजा नीति में बदलाव, कपास की खेती के लिए किसानों को हर संभव मदद, अच्छे बीज और कीटनाशक के अलावा अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं कराते हैं, तो आने वाले सालों में इसका रकबा और घट सकता है। धान जैसी खेती की ओर किसानों के बढ़ने से जमीनी पानी का संकट भी गहराएगा। यह आने वाले 10 से 15 साला में एक बड़ा असर डाल सकता है।

पिछले कई वर्षों में सिमट गई कपास की खेती

1990 के दशक में पंजाब में कपास के तहत 7 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र हुआ करता था, लेकिन पिछले कई वर्षों में यह धीरे-धीरे सिकुड़ गया। 2012-13 में कपास का रकबा 4.81 लाख हेक्टेयर था, जो 2017-18 में घटकर 2.91 लाख हेक्टेयर रह गया। 2018-19 में कपास का रकबा 2.68 लाख हेक्टेयर था। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2019-20 में यह घटकर 2.48 लाख हेक्टेयर हो गया और फिर 2020-21 में और 2021- 22 में क्रमशः 2.52 लाख हेक्टेयर और 2.51 लाख हेक्टेयर हो गया। पंजाब ने 2018-19 में 827 किलोग्राम लिंट प्रति हेक्टेयर की उपज दर्ज की थी, जो 2019-20 में घटकर 691 किलोग्राम लिंट प्रति हेक्टेयर हो गई। यह और गिरकर 437 किलोग्राम लिंट प्रति हेक्टेयर रह गया।

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