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अपने संसाधनों का भी बेहतर उपयोग नहीं कर पा रहा निगम, कैसे बढ़ेगा राजस्व

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चंडीगढ़। वित्तीय संकट से जूझ रहा नगर निगम अपने ही संसाधनों का बेहतर उपयोग नहीं कर पा रहा है। इस कारण निगम में रेवन्यू बढ़ने की बजाय खर्चे बढ़ रहे हैं। हाल ही में सदन में आए सामुदायिक केंद्रों के जिम के संचालन का एजेंडा भी कमेटी गठित कर आगे बढ़ा दिया गया जबकि इन जिमों का निगम खुद उपयोग नहीं कर पा रहा है।
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सदन में एजेंडा आया था कि शहर के सामुदायिक केंद्रों में बने जिम पीपीपी मोड पर चलाए जाएं। इस समय सभी सामुदायिक केंद्र के जिम बंद पड़े हैं। नगर निगम खुद सामुदायिक केंद्र में बने जिम को चलाने में असफल रहा है इसलिए इसे पीपीपी मोड पर चलाने की मंजूरी के लिए प्रस्ताव लाया गया था। सदन में एजेंडे को लेकर पार्षद रविकांत शर्मा ने कहा कि निगम ने उपकरण लगवाकर पहले ही पैसे निवेश कर दिए हैं। ऐसे में पीपीपी मोड कैसे रहा। वहीं, पार्षद अरुण सूद ने कहा कि क्यों न जिम ट्रेनर आउटसोर्सिंग पर रखे जाएं। पार्षद कंवरजीत राणा व गुरप्रीत ढिल्लो ने जिम की फीस को लेकर चर्चा की। हालांकि निगम के कुछ जिम में पूरे उपकरण नहीं हैं और कहीं सामुदायिक केंद्र नहीं हैं। ऐसे में सेक्टर व गांव-कॉलोनी के जिम में एक जैसी फीस रखने को लेकर बहस होती रही। अंत में कमेटी बनाकर इसका फैसला उसी पर छोड़ दिया गया।
इसी तरह दो माह पहले बैठक में महिला भवन के बेहतर उपयोग को लेकर निगम में एजेंडा आया था। रेवेन्यू बढ़ाने के उद्देश्य से एजेंडा में महिला संगठनों से बात कर महिलाओं से जुड़े कार्यक्रम के लिए भवन किराए पर देने का प्रस्ताव था, लेकिन भवन से ज्यादा ही रेवेन्यू लेने के उद्देश्य से पार्षदों व अफसरों में बात नहीं बनी और इसके लिए कमेटी बनाने को कह दिया। आज तक न कमेटी बनी और न इसके उपयोग की कोई चर्चा हुई।
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एजेंडे के अनुसार यह था प्रस्ताव
एजेंडे के अनुसार जिन सामुदायिक केंद्रों में जिम है उनको चलाने और रखरखाव की जिम्मेवारी ठेका लेने वाले व्यक्ति की होगी। जिन सामुदायिक केंद्र में जिम के उपकरण नहीं हैं, वहां पर वही उपकरण लगाकर उसका रखरखाव और संचालन करेगा। इस समय शहर में 45 से ज्यादा कम्युनिटी सेंटर हैं। प्रस्ताव के अनुसार, पीपीपी मोड पर ही जिम में ट्रेनर उपलब्ध होंगे। इसके एवज में ठेकेदार प्रति व्यक्ति एक फीस तय करेगा जो हर माह जिम का उपयोग करने वाले लोगों से लेगा।
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