कंपनियां जमा नहीं करवा रही वार्षिक रिटर्न
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पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश की तकरीबन दो हजार से अधिक कंपनियां नियमों की धज्जियां ही नहीं उड़ा रही हैं, बल्कि सरकार को भी गुमराह कर रही है। लेकिन अब ऐसी कंपनियों पर केंद्र सरकार के अधीनस्थ कारपोरेट मंत्रालय पूरी तरह सख्ती के मूड में है। मंत्रालय ने ऐसी कंपनियों को कंपनी एक्ट अधिनियम-248 के तहत नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
एक माह में जवाब नहीं देने पर इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। चंडीगढ़ की लगभग 350 से अधिक कंपनियों को भी नोटिस जारी किया गया है। इस इस वक्त पंजाब और चंडीगढ़ में तकरीबन 41 हजार और हिमाचल में 3300 कंपनियां वजूद में है।
इस तरह कंपनियां कर रही सरकार को गुमराह
कंपनी एक्ट के तहत का सभी कंपनियों को कारपोरेट कारोबार मंत्रालय के अंतर्गत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के क्षेत्रीय कार्यालयों में हर साल वार्षिक रिटर्न, बैलेंसशीट, स्टेट्स रिपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करवाने होते हैं। कार्यालय कंपनी के इन सभी दस्तावेज को अपने वेबसाइट पर सार्वजनिक भी करती है ताकि केंद्र व राज्य सरकारों, बैंकों, आयकर, सेल्स टैक्स इत्यादि कार्यालय कंपनी का वास्तविक स्टेट्स जान सके।
इसके अलावा संबंधित कंपनी से डील करने वाले सभी क्रेता-विक्रेता व अन्य पक्ष भी कंपनी के सही हालातों से रूबरू हो सके। इतना ही नहीं कोई भी व्यक्ति इस कार्यालय से संबंधित कंपनी का पूरा स्टेट्स 100 रुपये फीस देकर भी प्राप्त कर सकता है।
कंपनियां जमा नहीं करवा रही वार्षिक रिटर्न
सैकड़ों कंपनियों को भेजा नोटिस
लेकिन हैरानी की बात यह कि पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ की लगभग दो हजार से अधिक कंपनियां ऐसी है, जो रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ में पिछले काफी समय से न तो वार्षिक रिटर्न जमा करवा रहे हैं और न ही बैलेंस शीट व स्टेट्स रिपोर्ट। इसलिए मंत्रालय के निर्देशों पर क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से इन कंपनियों को नोटिस जारी कर एक महीने में जवाब तलबी की गई है।
चालाकी से होता है नुकसान
कारपोरेट कारोबार विशेषज्ञ अशोक गोयल के अनुसार कंपनियों की उक्त तरह की चालाकियां और मनमानियों से बैकिंग सेक्टर और संबंधित कंपनियों से डील करने वाले लोगों को बड़ा नुकसान भी हो जाता है। कई बार ऐसी कंपनियां बैंकों व मार्केट में अन्य वित्त एजेंसियों में गलत बैलेंस व रिटर्न पेपर के आधार पर लोन प्राप्त कर लेती है और बाद में खुद को दिवालिया घोषित कर देती है, जिस वजह सेे लोन राशि फंस जाती है और बड़ा नुकसान हो जाता है। इसलिए कारपोरेट कारोबार मंत्रालय के निर्देशों पर सभी कंपनियों का स्टेट्स और जरूरी दस्तावेज क्षेत्रीय रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज कार्यालय में जमा करवाना अनिवार्य किया गया है।