हम यहां कैसे रुक सकते हैं बेशक बिल्डरों ने काम शुरू कर दिया है और हमको भी आगे काम मिल जाएगा। हमारी समस्या अब काम से ज्यादा है किराया। हमारे पास न तो खाने को है न ही पैसे ऐसी स्थिति में हम या भूखे मर जाएं या फिर घर जाएं। यह आवाज है उन छह सौ मजदूरों की जोकि पिछले पांच दिनों से राधास्वामी सत्संग भवन के सामने डेरा डाले हैं।
इन मजदूरों को इंतजार है अपनी बारी का। छपरा जाने के लिए बैठे इन मजदूरों को दिन में तपती धूप का सामना करना पड़ता है तो रात को मच्छरों और गर्मी से जूझना पड़ता है। राधास्वामी सत्संग भवन के सामने रूके हुए राम खिलावन ने बताया कि उनके मकान मालिक ने उनसे किराया मांगा। उन्होंने जब कहा कि उनके पास कुछ नहीं है तो बोले खाली कर दीजिए।
ऐसी स्थिति में उनके पास चारा सिर्फ यही है कि वह अपने घर लौट जाएं। कम से कम नमक रोटी तो खाने को मिलेगी। वहीं कोई काम भी कर लेंगे। छपरा जाने के लिए अपने भाई के साथ मौजूद गंगा देवी ने बताया कि उनके पति ठेकेदार के अंडर में एक कंपनी में काम करते थे लेकिन लाकडाउन के कारण सारा कुछ खत्म हो गया। अब घर जाना ही एकमात्र रास्ता है।