कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान जान की परवाह किए बिना मजदूरों को छोड़ने उत्तर प्रदेश गए रोडवेज कर्मचारियों को दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। यहां तक कि यूपी पुलिस ने बाराबंकी में रोडवेज चालक की पिटाई भी की। कर्मचारियों को न तो सेफ्टी किट दी गई और न ही एक हजार रुपये मिले। उत्तर प्रदेश व हरियाणा सरकार के आदेश तार-तार होने से रोडवेज कर्मचारियों में नाराजगी है।
परिवहन विभाग ने पलवल, झज्जर व बहादुरगढ़ डिपो की बसों में सहायक के तौर परिचालक को नहीं भेजा गया था। कोई बस सैनिटाइज भी नहीं की गई। बतौर अग्रिम राशि किसी भी चालक को पैसा नहीं दिया गया। यही नहीं रास्ते में इन बसों को सुरक्षा उपलब्ध कराना तो दूर की बात, पलवल डिपो के चालक खुर्शीद के साथ लखनऊ बाईपास के बाराबंकी चौक पर मारपीट की गई।
वह गोरखपुर का रास्ता जानने के लिए रुका था, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मचारियों ने उसे गालियां और थप्पड़, घूसों व डंडे से उसकी पिटाई की। बावजूद इसके खुर्शीद ने मजदूरों को घर पहुंचाया। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन ने हरियाणा व उत्तर प्रदेश सरकार से मारपीट में संलिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यूनियन ने बिना परिचालक बसें भेजने पर पलवल व झज्जर डिपो के महाप्रबंधक व यातायात प्रबंधकों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी मांग उठाई है।
दुर्व्यवहार, मारपीट को लेकर लिखा पत्र
हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान इंद्र सिंह बधाना, महासचिव सरबत सिंह पूनिया, कोषाध्यक्ष राजपाल, मुख्य संगठन सचिव विजेंद्र अहलावत व प्रेस सचिव श्रवण कुमार जांगड़ा ने बताया कि चालक, परिचालकों के साथ हुए दुर्व्यवहार व पिटाई को लेकर सरकार, परिवहन मंत्री व परिवहन निदेशक को पत्र लिखा है। रोडवेज कर्मचारी संकट की घड़ी में पीछे हटने वाले नहीं हैं, बशर्ते उनका उत्पीड़न न हो। महामारी में ड्यूटी करने वाले सभी कर्मचारियों को विशेष पदोन्नति, इंक्रीमेंट, जोखिम भत्ता दें व महामारी खत्म होने पर सम्मानित किया जाए।
पत्र में ये खामियां भी उजागर की
- मजदूरों को छोड़ने के लिए भेजी गई किसी भी गाड़ी का मैकेनिकल टेस्ट नहीं हुआ। गाड़ियों की फिटनेस तक नहीं देखी गई। रोडवेज कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण तक मुहैया नहीं करवाए गए।
- भेजी गई बसों में 25 से ज्यादा बसों में परिचालकों (बतौर सहायक) को नहीं भेजा गया, जो कर्मचारी नियमावली का उल्लंघन है।
- कर्मचारियों को मार्ग पर भेजने से पहले अग्रिम राशि देनी बनती थी, जो नहीं दी गई। इससे कर्मचारियों को गाड़ी के तेल का खर्च व अपना खर्च भी स्वयं उठाना पड़ा।
- हरियाणा व उत्तर प्रदेश के रास्ते में आने वाली समस्याओं से निजात पाने के लिए पारित आदेश को किसी भी राज्य सरकार द्वारा अमल में नहीं लाया गया।