देश में चारों तरफ फैले कोरोना के संक्रमण के बीच हरियाणा में मौजूद करीब 45 हजार श्रमिक अपने घरों की तरफ जाना चाहते हैं। अधिकतर मजदूरी करने वाले यह लोग अब यहां रहकर दिन काटना नहीं चाहते। गृह मंत्री अनिल विज ने बताया कि हरियाणा में दूसरे प्रदेशों से आए हुए 45000 लोग जाने का मन बना लिया है।
अभी रजिस्ट्रेशन का काम जारी है। जब इनके रजिस्ट्रेशन का काम पूरा हो जाएगा तो सरकार इन्हें भेजने के लिए ट्रेन करेगी। फिलहाल 1200 लोगों के लिए एक ट्रेन चलाने के लिए अनुमति दी है। रेलवे का कहना है कि ऐसे लोगों को दूसरे प्रदेशों में भेजने के लिए नान एसी स्लीपर गाड़ियां दी जाएंगी। एक ट्रेन में 20 कोच होंगे और यह गाड़ियां सीधे उसी स्टेशन पर रुकेंगी।
जहां के लिए यह श्रमिक जाएंगे बीच में ये रेलगाड़ियां कहीं भी नहीं रुकेंगी। विज ने बताया कि इस बार एक और बात देखने में आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि श्रमिक चाहे पंजाब के हों, तमिलनाडु के या फिर किसी और प्रदेश के सभी एक बार अपने घर जाना चाहते हैं।
ऐसा लगता है कि कोरोना की वजह से इनमें असुरक्षा की भावना आई है। जिसकी वजह से यह घर जाना चाह रहे हैं। ऐसा नहीं है कि हम अपने प्रदेश में इनको बेहतर सुविधाएं नहीं दे रहे हैं। हमारे यहां मेडिकल सुविधाएं भी अन्य प्रदेशों से बेहतर है। लेकिन उसके बावजूद लोग जाना चाह रहे हैं।
मजदूरों को नि: शुल्क घर भेजेगी हरियाणा सरकार
हरियाणा में फंसे बिहार, झारखंड व मध्य प्रदेश के सभी मजदूरों को जल्दी उनके गृह राज्यों में सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से विशेष श्रमिक ट्रेन में भेजा जाएगा। हरियाणा सरकार उन्हें नि:शुल्क घर भेजेगी। बाकी राज्यों के प्रवासी मजदूरों की संख्या हरियाणा में कम है, इसलिए नई दिल्ली से विशेष ट्रेनों के माध्यम से उनकी वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती राज्यों के खेतिहर मजदूरों को बसों के माध्यम से उनके घर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि वे जहां है, वहीं रहें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। उन्हें भेजने की पूर्ण व्यवस्था की जा रही है।