पंजाब के निजी अस्पताल संचालकों के लिए ‘आगे कुआं पीछे खाई’ वाले हालात बन गए हैं। निजी चिकित्सक परेशान है कि वे क्या करें। क्योंकि एक तरफ मुख्यमंत्री ओपीडी न शुरू करने पर निजी चिकित्सकों के लाइसेंस रद्द करने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कई जिलों के डीसी ही हुक्म जारी कर चुके हैं कि अगर ओपीडी चलाई तो कार्रवाई होगी।
अमर उजाला के पास मोगा, पटियाला और मोहाली के डीसी के लिखित आदेशों की प्रतियां है, जिसमें उन्होंने अपने इलाके के निजी अस्पताल व क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सकों को सख्त आदेश दे रखे हैं कि अगर उन्होंने ओपीडी की तो उनके लाइसेंस कैंसिल होंगे और कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की जाएगी। चिकित्सकों का तर्क है कि हम तो ओपीडी हर समय करते हैं, सरकार ने सख्ती कर रखी है, जिस कारण कई जिलों में ओपीडी बंद है।
मोगा के डीसी ने 28 मार्च को पत्र संख्या नंबर 3094 के जरिए यह आदेश जारी किए। सीएम के गृह जिले पटियाला के डीसी ने 30 मार्च को आदेश जारी किए। इसमें पैरा नंबर 6 में साफ लिखा है कि अगर निजी अस्पताल संचालक ओपीडी चलाते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। ई-कंसल्टेशन के जरिए ही चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
कैप्टन साहब आईएमए तो आपके साथ है...
पंजाब आईएमए के प्रधान डॉ. नवजोत दहिया का कहना है कि पंजाब के कई चिकित्सकों ने उनको डीसी के आदेशों के बारे में अवगत करवाया है। आईएमए तो पंजाब सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है, चिकित्सक मैदान छोड़कर भाग नहीं रहे हैं। पंजाब सरकार को पूरा सहयोग कर रहे हैं। कई जिलों में कैंप लगाए गए हैं, कई जिलों में आईएमए के जरिए चिकित्सकों ने अपने अस्पतालों में कोरोना के वार्ड तैयार किए हैं।