कर्फ्यू और लॉकडाउन के चलते पंजाब सरकार द्वारा 20 अप्रैल को लोहा कारोबार को दी गई राहत उद्योगपतियों के गले नहीं उतर रही है। जैसी शर्तें सरकार ने उद्योगों को चलाने के लिए रखीं हैं, उनसे उद्योग जगत ने फैक्ट्रियां चलाने के लिए कोरी ना की है। अधिकतर उद्योगपति सरकार के फैसले से सहमत नहीं है।
मंडी गोबिंदगढ़ में सभी औद्योगिक इकाईयों की गवर्निंग बॉडी स्टील चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव केके जिंदल व पाइप प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा है कि कोरोना के दौरान पंजाब सरकार द्वारा इंडस्ट्री चलाए जाने के फैसले का वह स्वागत करते हैं। फैक्टरी में अगर कोई मजदूर कोरोना पॉजिटिव आया तो फैक्टरी मालिक पर केस दर्ज होगा, वह इस फैसले से बिल्कुल सहमत नहीं है। इसलिए अधिकतर इंडस्ट्री बंद रहेगी।
कोई भी मालिक अपने पर केस दर्ज नहीं करवाना चाहता। बशर्ते वह मजदूरों को फैक्टरी में खाने और रहने की सुविधा भी दे सकते हैं। इसके अलावा पाइप प्लांट एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक शर्मा ने बताया कि हर फैक्टरी में 50 से अधिक मजदूर काम करते हैं। इसमें अगर कोई मजदूर कोरोना संक्रमित होता है तो वहां के सेहत विभाग तथा स्थानीय प्रशासन सेहत सुविधा के साथ-साथ सैनिटाइज करवाने के साथ सभी प्रबंध पूरे रखे ताकि मिल मालिकों पर केस दर्ज किए जाएं।
सरकार को अपनी शर्तों में भी इंडस्ट्री को राहत देनी चाहिए और इस पर दोबारा विचार कर कार्रवाई करने का फैसला वापस लेना चाहिए। वह नहीं चाहते कि नोएडा की तरह फैक्टरी मालिक पर केस दर्ज हो। वह सिर्फ अपनी फैक्टरी में मजदूरों को सामाजिक दूरी रखने में आगाह कर सकते हैं लेकिन उनके घर जाने के बाद नहीं। औद्योगिक मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा ने कहा है कि पंजाब सरकार ने इंडस्ट्री चलाने का कोई फैसला वापस नहीं लिया है। इसके लिए उद्यमी अपनी फैक्ट्रियां चला सकते हैं।
20 अप्रैल को फैक्ट्रियां चलाई जा सकती है लेकिन इससे पहले जिले के डीसी यह तय करेंगे कि उनके जिले में कोरोना के कितने मरीज हैं। क्या वहां फैक्ट्रियां चलाई जानी ठीक हैं। फैक्ट्रियां चलाने या ना चलाने के अधिकार डीसी को दिए गए हैं।