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हरियाणाः आढ़ती अपनी मांगों पर अड़े हैं, सरकार भी पीछे हटने को तैयार नहीं, असमंजस में किसान

Thu, 23 Apr 2020 12:55 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा की मंडियों में सरसों के बाद अब गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है। लेकिन कई जगह आढ़ती हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं असमंजस में फंसे अधिकतर किसान फसल के साथ अपने खेतों और घरों में ही डटे हुए हैं। काम ठप कर बैठे आढ़ती जहां सरकार से बातचीत कर मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने की बात कर रहे हैं। वहीं किसान भी मंडियों में कुछ और सहूलियतों की उम्मीद कर रहा है। अगर आढ़ती अड़े हैं, तो फिलहाल सरकार भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसानों का एक-एक दाना हर हालत में खरीदा जाएगा।
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भले ही उसके लिए अन्य वैकल्पिक व्यवस्था क्यों न करनी पड़े। इसी दिशा में सरकार ने ग्राम पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों को भी ऑफर दिया है कि वह मंडी और खरीद केंद्रों में बिचौलियों की तरह काम करें सरकार आढ़तियों की तरह उन्हें भी कमीशन देगी। वहीं कहीं जगह सरकारी एजेंसियों को भी सीधी खरीद के लिए अधिकृत कर दिया गया है। 1399 अनाज मंडी और खरीद केंद्रों में 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद का काम शुरू कर दिया गया है पहली बार लॉन्ग डॉन की वजह से सरकार ने चार गुना खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई है।

आढ़ती बोले, खरीद, भुगतान का पुराना सिस्टम लागू हो
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं कानफेड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग, विभिन्न आढ़ती संगठनों के प्रधान धर्मपाल उकलाना, पवन गर्ग हिसार, गुरदीप कामरा डबवाली, धर्मवीर पानीपत और रतन राजलीवाला बरवाला के अनुसार सरकार अपनी जिद छोड़ कर मंडी और खरीद केंद्रों में खरीद और भुगतान कार्य दोनों पहले की तरह बहाल करें। गर्ग और उकलाना ने कहा कि आढ़ती और किसानों का रिश्ता बहुत गहरा है और उनकी आपसी समझ भी बहुत गूढ़ है।
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इसलिए जैसा पहले चलता आ रहा था, वैसे चलने दिया जाए ऑनलाइन के चक्कर में न तो किसानों को उलझाया जाए न ही आढ़तियों को। आढ़ती कोई फालतू कमीशन मांग रहे हैं। इसलिए उनकी मांगों पर सरकार विचार करें। ताकि मंडियों में खरीद का काम तेज हो सके। सरकार खरीद, बारदाना, सिलाई, अनाज उठान व फसल का भुगतान के अलावा हर प्रकार के पुख्ता प्रबंध करें।
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किसानों का अपना दर्द, दो दिन का अल्टीमेटम

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने मांग की है कि सीजन में समुचित खरीद न होने से गेहूं उत्पादक किसानों में असंतोष पनप रहा है। कर्मचारी किसानों के साथ सही तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं। अध्यक्ष के अनुसार किसान के मांगने पर एक दिन मंडी गेट पास उसे उपलब्ध करवाया जाए, ताकि किसान आसानी से अपनी गेहूं मंडी में ला सके। जिन खरीद केंद्रों पर एफसीआई को खरीद सौंपी गई है, वहां प्रदेश की एजेंसी को नियुक्त किया जाए। बड़ी अनाज मंडियों में गेट पास की संख्या प्रतिदिन 50 की बजाय 100 की जाय। मनरेगा मजदूरों से सिर्फ एक ही शिफ्ट में मंडी में कार्य करवाया जाए।

उनके अनुसार यूनियन ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, उसके बाद आंदोलन की रणनीति पर विचार किया जाएगा। किसान हरकेश सिंह मोहड़ी, अच्छर सिंह उगाड़ा, जगबीर सिंह घसीटपुर, भाग सिंह डंगडेहरी, चूहड़ सिंह और निर्मल सिंह नकटपुर ने बताया कि आढ़तियों की हड़ताल की कि वजह से किसान पसोपेश की स्थिति में हैं। इसलिए अभी तक अधिकतर किसानों ने अपनी फसल काट कर अपने घर और खेतों में ही रखी हुई है। मजदूरों की भी भारी कमी खल रही है। इसलिए सरकार से मांग है कि जिन प्रवासी मजदूरों को शिविरों में रखा गया है। उन्हें किसानों के खेतों में काम पर लगाने की व्यवस्था भी सरकार करे।  

जहां आढ़तियों द्वारा गेहूं की खरीद नहीं की जा रही है वहां संबंधित एजेंसियों को सीधी खरीद करने के निर्देश दे दिए हैं। जो पंचायत या एफपीओ गेहूं खरीद करने में बिचौलिये की भूमिका निभाएगी। उनके खाते में आढ़त की रकम भेजी जाएगी। अगर कोई सक्षम व्यक्ति या संस्था आढ़त के लाइसेंस के लिए आवेदन करता है, तो उपायुक्त उनको नियमानुसार लाइसेंस जारी कर सकते हैं।
- संजीव कौशल, अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि एवं कल्याण विभाग

सरकार ने अभी तक हमारे फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के सदस्य किसानों का ही अनाज खरीदने के लिए अधिकृत किया गया था। मगर अब मंडी और खरीद केंद्रों में हमें अन्य किसानों का भी गेहूं खरीदने के लिए अधिकृत कर दिया है। कई फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन ने काम भी शुरू कर दिया है। आने वाले कुछ दिनों में हमारा हर प्रतिनिधि सभी मंडियों और खरीद केंद्रों पर तैनात किया जाएगा। ताकि किसानों को संपर्क करने में दिक्कत न हो।
- इंद्रजीत सिंह, चीफ कोऑर्डिनेटर, हर किसान प्रोड्यूसर कंपनी
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