कोरोना महामारी का असर अब वकीलों पर भी पड़ने लगा है। ऐसे में बार एसोसिएशन ने वकीलों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। कुछ शर्तों के साथ बार एसोसिएशन ने वकीलों को पांच हजार रुपये प्रतिमाह देने का फैसला लिया है ताकि किसी वकील को कोई समस्या न हो। पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान सदस्य एडवोकेट लेखराज शर्मा ने बताया कि पंजाब-हरियाणा बार काउंसिल को विभिन्न बार एसोसिएशन के प्रधानों ने आर्थिक सहायता मुहैया करवाने के लिए पत्र भेजना शुरू कर दिया है।
वकीलों और उनके साथ काम करने वाले मुंशियों को आर्थिक सहायता देने की मांग उठने लगी है। एडवोकेट लेखराज शर्मा ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब-हरियाणा के वकीलों व मुंशियों के लिए कुछ शर्त के साथ मदद की तैयारी की गई है। इसमें जो वकील 5 साल से कम की प्रैक्टिस करने वाला है और जिसके पास शहर में अपना मकान व कार नहीं है, पांच एकड़ से कम भूमि हो, माता-पिता सरकारी सेवा में न हों, उन्हें बार काउंसिल से पांच हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक दी जाएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान
इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वकीलों और मुंशियों की आर्थिक स्थिति पर संज्ञान लेते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से इस संदर्भ में 20 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से संज्ञान लेने के बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बार एसोसिएशन ने भी यह कदम उठाया है।
वकीलों के लिए प्रावधान, मुंशियों के लिए नहीं समाधान
लेखराज शर्मा ने बताया कि वकील पिछले कई दिनों से घर पर बैठे हैं। ऐसे में जिन वकीलों की अच्छी प्रैक्टिस थी, वह भी अब धीरे-धीरे पैसों के मोहताज होते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में मुंशियों को राशि देने के लिए बार काउंसिल आदेश जारी नहीं कर सकती है, लेकिन बार काउंसिल ने सभी वकीलों से अनुरोध किया है कि वह अपनी ओर से मुंशियों के लिए कुछ न कुछ आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाएं।
मुंशी आर्थिक तंगी से जूझ रहे
हाईकोर्ट और जिला अदालतों में कोरोना वायरस के चलते अवकाश के बाद अब वकीलों के साथ कार्य करने वाले मुंशी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कोई भी मुंशी अपना नाम सामने लाने को तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि मुंशियों का वेतन 4 से 10 हजार के बीच होता है। जो वकील अच्छा कमाते हैं, वह तो थोड़ी बहुत सहायता मुंशियों को उपलब्ध करा रहे हैं।
लेकिन जिन वकीलों की प्रैक्टिस कम है, उनके साथ काम करने वाले मुंशी अब आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। जहां कुछ मुंशी लॉकडाउन आरंभ होने से पहले अपने अपने घर को निकल गए थे। वहीं, जो मुंशी अपने कार्यस्थल पर फंसे हुए हैं, वह स्थानीय प्रशासन की दया पर निर्भर हैं। उन्होंने बार काउंसिल से मांग की है कि वकीलों की तर्ज पर अब उन्हें भी आर्थिक सहायता मुहैया करवाई जाए।
अगर आएगी शिकायत तो करेंगे मदद
जिला अदालत की बार एसोसिएशन के प्रधान एनके नंदा ने बताया कि अभी तक उनके पास किसी भी मुंशी का अपनी समस्या को लेकर कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर ऐसी कोई शिकायत आती है तो हम उनकी सहायता जरूर करेंगे। सबसे पहले हर मुंशी की जिम्मेदारी उस वकील की है, जिसके पास मुंशी काम करते हैं। वकीलों को उनकी पूरी तनख्वाह देनी चाहिए।
दूसरी बात यह है कि अगर प्रैक्टिस करने वाले किसी भी वकील को भी इस आर्थिक दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है तो वह उसकी सहायता करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रैक्टिस करने वाले वकीलों और मुंशियों की समस्याओं को लेकर अपनी एसोसिएशन में भी बात करेंगे।