वहीं स्कूल प्रशासन को सभी टीचरों की सैलरी पूरी देनी होगी। निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने कि अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोई भी निजी स्कूल लाइब्रेरी, बस, स्पोर्ट्स समेत किसी भी प्रकार की फीस नहीं वसूल सकते हैं।
स्कूलों की बैलेंस शीट अपलोड करने के मामले को इस फीस वाले केस के साथ नहीं जोड़ा जाए। पंजाब और हरियाणा ने भी अपने पुराने आदेशों में बदलाव कर स्कूल फीस जमा करवाने को कहा है। - अरुण कुमार गुप्ता, प्रिंसिपल सेक्रेटरी एजुकेशन
क्या कहते हैं अभिभावक
अभी तक लोग पूरी तरह से अपने काम पर भी नहीं लौटे हैं। प्रशासन ने पहले खुद परिजनों को थोड़ी राहत दी थी। लेकिन प्रशासन प्राइवेट स्कूलों के आगे झुक गया है। यह मिडिल क्लास पर इस कठिन समय में बोझ डालने वाला फैसला है। प्रशासन को परिजनों के बारे में भी सोचना चाहिए। -प्रवीण
मैं अपनी बेटी का तीन माह ही फीस जमा करा चुका हूं। हालांकि उनका काम अभी तक बंद है। प्रशासन ने शिक्षा के अधिकार का मजाक बनाया हुआ हैं। वह हमेशा स्कूलों की तरफ से की जाती मनमानी पर कार्रवाई करने की बजाय परिजनों पर ही बोझ डालते हैं। -इमाम जफ्फर
प्रशासन को पहले स्कूलों की बैलेंस शीट चेक करना चाहिए था
चंडीगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन गोयल ने कहा कि प्रशासन को पहले स्कूलों की बैलेंस शीट चेक करना चाहिए था। कई आदेशों के बाद भी सभी स्कूलों ने अपना खर्चा नहीं दिखाया है। वहीं अप्रैल तक परिजनों की ओर से जमा फीस का की डिटेल भी देखनी चाहिए थी कि वाकई में स्कूल के पास स्टाफ को सैलरी देने का बजट है या नहीं। लगभग 60 प्रतिशत परिजन बच्चों की तीन महीने एडवांस फीस जमा करवा चुके हैं।