जाको राखे साइयां, मार सके न कोय... यह कहावत बापूधाम निवासी नवजात के केस में सच साबित हुई। बीते बुधवार को जीएमएसएच-16 में एक कोरोना पॉजिटिव मां ने बच्चे को जन्म दिया था। संक्रमण के डर से जन्म के 24 घंटे बाद ही नवजात को मां से अलग कर दिया गया। राहत की बात यह है कि नवजात में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
जीएमएसएच से भेजे गए उसके जांच के नमूने की रिपोर्ट निगेटिव आई है। रिपोर्ट आने के बाद उसे सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। नवजात की रिपोर्ट निगेटिव आने की सूचना मिलने पर अस्पताल में बच्चा चर्चा का विषय रहा। लोगों का यही कहना था कि जिस पर ईश्वर की कृपा होती है, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।
बता दें कि बापूधाम की कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिला को बुधवार को जीएमएसएच में प्रसव पीड़ा पर इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। स्थिति गंभीर होने के कारण उसका उसी दिन सिजेरियन किया गया। उसने एक बेटे को जन्म दिया। कोरोना के लक्षण दिखने के कारण उस महिला का सैंपल डिलिवरी से पहले लिया गया था। लेकिन रिपोर्ट आने में 24 घंटे का समय लग गया। इतनी देर में उस महिला के संपर्क में अस्पताल के कई डॉक्टर और स्टाफ आ चुके थे। उन सभी पर भी कोरोना का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल सभी को चिह्नित कर घर भेज दिया गया है।
मां का पीया दूध, 24 घंटे साथ रहा फिर भी संक्रमित नहीं हुआ नवजात
कोरोना पॉजिटिव मां की कोख से जन्म लेने के बाद नवजात अगले 24 घंटे तक उसी के बेड पर एक साथ रहा। इस दौरान उसने कई बार मां का दूध भी पीया। मां ने उसे कई बार गले लगाया, उसका माथा चूमा। अपनी मां की गोद मे रहने के बावजूद उसे कोरोना अपनी चपेट में नहीं ले पाया। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, वृद्ध और गर्भवती महिला में कोरोना होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।