चंडीगढ़ में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से तैनात की गई विशेष टीम ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन को सौंप दी। अपनी रिपोर्ट में केंद्र के विशेषज्ञों ने चंडीगढ़ प्रशासन को सलाह दी है कि संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान के लिए बनाई गई टीम को और मजबूत करने की जरूरत है। मौजूदा समय में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं, जबकि दोनों को मिलाकर एक टीम बनाने की जरूरत है।
दक्षिण सेक्टरों में बढ़ रहे केसों को देखते हुए सेक्टर-32 मेडिकल कॉलेज में टेस्टिंग की सुविधा बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। वहीं, संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए पीजीआई और मेडिकल कालेज में कोरोना के मरीजों के लिए और अधिक बेड की संख्या तैयार करने को कहा गया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर गठित टीम में पीजीआई की महामारी विशेषज्ञ प्रोफेसर पीवीएन लक्ष्मी व राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के डिप्टी डायरेक्टर साहिल गोयल शामिल थे।
एक टीम पर अधिकतम 25 एक्टिव केस हों
केंद्र के विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जोन स्तर पर कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम को तैयार करने की जरूरत है। इस टीम पर अधिकतम 25 एक्टिव केस की जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान जल्दी हो सके। अभी दो अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं। एक स्वास्थ्य विभाग की और दूसरी नगर निगम की। स्वास्थ्य विभाग की टीम का काम क्वारंटीन और टेस्टिंग करना है, जबकि नगर निगम की टीम का काम क्वारंटीन करना। नगर निगम के मुकाबले स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ कम है। ऐसे में टीम के उनके स्टाफ को बढ़ाए जाने की जरूरत है।
दक्षिण सेक्टर में केस ज्यादा, मेडिकल कॉलेज में टेस्ट सुविधा बढ़े
केंद्रीय टीम ने पाया है कि दक्षिण सेक्टरों में केस तेजी से बढ़ रहे हैं। लिहाजा सेक्टर-32 मेडिकल कॉलेज में टेस्टिंग सुविधाएं बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। कंटेनमेंट जोन में फील्ड टीम भेजकर रैपिड एंटीजन टेस्टिंग करवानी चाहिए। इसके साथ पीजीआई की इमरजेंसी वार्ड में एंटीजन परीक्षण शुरू करने की जरूरत है ताकि पॉजिटिव मरीजों को जल्द से जल्द आइसोलेट किया जा सके। केंद्रीय टीम ने चंडीगढ़ प्रशासन के रैपिड रिस्पांस टीम और फील्ड टीम के बीच संपर्क साधने की व्यवस्था को काफी बेहतर पाया और तारीफ भी की है।
बेड बढ़ाएं, अधिक से अधिक कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें
केंद्रीय टीम ने कहा कि तीनों अस्पतालों के बीच अच्छा तालमेल होना चाहिए और बैक रेफरल को मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही पीजीआई और सेक्टर 32 को केस बढ़ने की स्थिति में और अधिक बेड बढ़ाने के लिए तैयार रहना होगा। टीम ने यह भी सिफारिश की है कि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। कम से कम इतना जरूर करें ताकि वे मध्यम बीमार मरीजों की देखभाल कर सकें।
घर पर रखना है या कोविड सेंटर ले जाना है, 24 घंटे में लें निर्णय
होम आइसोलेशन पर टीम ने कहा है कि संक्रमित व्यक्ति के परिवार को 24 घंटे के अंदर संपर्क कर उन्हें मरीज से अलग करने की जरूरत है। साथ यह भी तुरंत निर्णय लेना होगा कि उन्हें कोविड सेंटर में ले जाना है या घर के बाहर बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में। खासकर उन मरीजों को सख्ती से अलग करना चाहिए जो पहले से किसी बीमारी से पीड़ित हैं।
डाटा अपडेट होना चाहिए
टीम ने यह भी पाया है कि पिछले कुछ दिनों में टेस्टिंग की कुल संख्या में अचानक से इजाफा हुआ है। दरअसल, निगेटिव सैंपल की रिपोर्ट को अपलोड नहीं किया गया था, जिसे अब अपलोड किया जा रहा है। टीम ने सिफारिश की है कि रियल टाइम डाटा अपडेट करने की नीति पर काम करना होगा। पीजीआई को भी सुनिश्चित करना होगा कि वह निगेटिव रिजल्ट की रिपोर्ट को समय पर अपलोड करे।